लाइफस्टाइल

रोग से मुक्ति के लिए उचित आहार जरूरी

चरक संहिता के अनुसार किसी भी रोग से मुक्ति के लिए उचित आहार लेने का अत्यंत महत्व है। औषधि के प्रयोग से मिलने वाला लाभ उचित आहार लेने से ही मिल सकता है। सही भोजन लेना औषधि लेने से 100 गुना अधिक लाभदायक है। अनुचित खानपान ही शरीर में रोग का मुख्य कारण होता है हम सभी भोजन खाते हैं तथा हमारा शरीर भी मिट्टी, अग्नि, जल, वायु तथा आकाश नामक पाँच पंचतत्वों (भूत) से बना होता है। शरीर में ये पंचतत्व रस, रक्त, माँस, वसा, अस्थि मज्जा तथा वीर्य नामक वस्तुओं (धातुओं) के रूप में होते हैं। भोजन का कार्य इन धातुओं का पोषण करना, इनके संतुलन को बनाए रखना तथा पाचन-क्रिया का जारी रखना है। जो भोजन खाया जाता है, वह पहले एक रस में परिवर्तित होता है, तत्पश्चात रक्त, मांस तथा अन्य धातुओं में। पाचन-प्रक्रिया के दौरान एक हल्की प्रतिक्रिया होती है जिससे एक झागदार पदार्थ कफ' बनता है। कुछ समय पश्चात जब भोजन अधपचा होता है, तब एक खट्टी प्रतिक्रिया शुरु हो जाती है। इस प्रतिक्रिया द्वारा आँतों में भोजन से एक तरल पदार्थ -पित्त’ बनता है। आँतों में थोड़ा और नीचे, पचा हुआ भोजन एक सूखे अम्बार में बदल जाता है और इस प्रक्रिया में एक कटु एवं कठोर प्रतिक्रिया आरंभ होती है, जिसमें वात (वायु) उत्पन्न होती है। अर्थात हमारे शरीर की जो संरचना है मानव शरीर का जो निर्माण होता है वह किसी चमत्कार से कम नही होता है । जिस प्रकार हम फसल व पेड़ो को सुरक्षित रखने और उनको बड़ा करने के लिए नियमित पानी देना, खाद्य देना तथा समय समय पर गुड़ाई करनी इस प्रकार यदि हम पेड़ पौधों व फसलों की नियमित देखभाल करेगे तभी वह हमे पेड़ फल और फसल अनाज प्रदान करते है , जरा सी लापरवाही पेड़ पौधों व फसलों को बर्बाद कर सकती है , अपने जीवन काल मे हम सभी यह अनुभव जरूर किये होंगे । ठीक इसी प्रकार हमें आपने शरीर पर ध्यान देना होगा । पेड़ पौधे मे की गयी लापरवाही का तत्काल असर दिखाई देता है, लेकिन शरीर पर इसका धीरे – धीरे असर पड़ता है और समय बीतने के साथ एक दिन ऐसा आता है कि हम बेड पर लेट जाते है और अस्पताल हमारा घर बन जाता है । रोग अर्थात अस्वस्थ होना। यह चिकित्साविज्ञान का मूलभूत संकल्पना है। प्रायः शरीर के पूर्णरूपेण कार्य करने में में किसी प्रकार की कमी होना ‘रोग’ कहलाता है। जिस व्यक्ति को रोग होता है उसे ‘रोगी’ कहते हैं। हिन्दी में ‘रोग’ को ‘बीमारी’ , ‘रुग्णता’, ‘व्याधि’ भी कहते हैं। और दैनिक जीवन मे खानपान व जीवन शैली मे की गयी लापरवाही के कारण शरीरिक रोग उत्पन्न होते है । ऐसा नही की कोई रोग स्वतः जन्म लेता है , हर एक रोग उत्पन्न होने के जिम्मेदार हम खुद होते है । हमारे शरीर को फिट करने के लिए पोषक तत्व की जरूरत होती है ।पोषक तत्व वह पदार्थ हैं जो शरीर को समृद्ध करते हैं। यह ऊतकों का निर्माण और उनकी मरम्मत करते हैं, यह शरीर को उष्मा और ऊर्जा प्रदान करते हैं और यही ऊर्जा शरीर की सभी क्रियाओं को चलाने के लिए आवश्यक होती है। पोषक तत्वों के सेवन के विभिन्न तरीके हैं,
जैविक पोषक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन (अमिनो अम्ल) और विटामिन शामिल हैं। आज कल जो खानपान शैली है उसमे उससे हमारे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नही मिल पाते है और धीरे धीरे शरीर रुग्ण होता चला जाता है । हम अपने घर मे चाहे जितना प्रयास कर ले लेकिन अपने खान पान पर लापरवाही कर ही जाते है । शरीर को भरपूर मात्रा मे डाइट मिले कब कितना कब कैसे खाना है इसकी जानकारी किसी को नही है । जिस तरह खेल सीखने के लिए स्टेडियम जाते है । पढ़ने के लिए स्कूल जाते है । उसी प्रकार हमारा खान पान कैसा होना चाहिए हमारी लाइफ स्टाइल कैसी होनी चाहिए एक उम्र के बाद यह जानने की जरूरत है , अन्यथा शुगर, ब्लड प्रेसर रक्त अल्पता यानी खूनी कमियों हड्डियों मे कमजोरी मोटापा होना चक्कर आना जल्द थकान हो जाना कम मे मन न लगना कुल मिलकर जीवन जीना भारी लगने लगता है और डाक्टर हमे दवा लिखते है फायदा हुआ तो ठीक नही तो दूसरी दवा अर्थात दवा व डाक्टर पर निर्भर हो जाते है लेकिन और जीवन निराशा पूर्ण हो जाता है । लेकिन दुनिया बहुत आगे जा चुकी है । हम अपनी लाइफ स्टाइल व खान पान ठीक करके बीमारियों से छुटकारा पा सकते है और खुशहाल जीवन जी सकते है शास्त्रो मे भी वर्णित है कि सबसे बड़ा धन होता है निरोगी काया हमारा स्वास्थ्य कैसे ठीक होगा और हमेशा कैसे फिट रह सकते है पूरी उर्जा व उत्साह से अपना काम बिना थकान के कर सकते है । इसके लिए भी अब देश के विभिन्न जगहों पर हर्बल लाइफ सेण्टर खुल गये है जहां सुबह आपका शरीर कैसे बेहतर हो और हमारा खान पान कैसा हो जिससे की हम रोगों से मुक्त रहे और यदि रोग से ग्रसित हो गये हो तो वह कैसे ठीक किया जा सकता है । इस पर बहुत बारीकी से बताया जाता है इस संबध मे अधिक जानकारी के लिए लेखक से सम्पर्क कर सकते है ।
रामकुमार यादव
919839222293

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