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मात्र 50 रुपये के लिए उपभोक्ता को परेशान करने के मामले में एलडीए सचिव तलब, गैरहाजिर हुवे तो गैर जमानती वारंट होगा जारी

लखनऊ – लखनऊ विकास प्राधिकरण की स्थापना सरकार ने जनकल्याण के लिए किया था लेकिन जनकल्याण जब उपभोक्ता के लिए परेशानी का सबक बन जाए तो जनता को सिर्फ न्यायालय से ही आस रहती है। प्राधिकरण से हैरान परेशान आवंतीयो को सिर्फ न्यायालय से ही न्याय मिल रहा है। मामला मात्र 50 रुपये का है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अपनी ही गलती से मात्र 50 रुपये के लिए उपभोक्ता को इतना परेशान कर दिया कि मामला राज्य उपभोक्ता फोरम तक पहुच गया। दरसल पूरा मामला ओ0 टी0 एस0 का है जो सरकार आवंटियों की सुविधा के लिए समय समय पर निकालती है। ओ0 टी0 एस0 के अन्तर्गत रुपया 10,29,984.35 पैसा जमा करना था , जबकि धनराशि रुपया 10,29,934.35 पैसा जमा किया गया है । मात्र 50.00 रुपये की कमी के कारण उपभोक्ता प्रताडित हो रहा है । इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने सचिव, लखनऊ विकास प्राधिकरण दिनांक 12.02.2021 को सुबह 10.30 बजे इस सम्बन्ध में पीठ के समक्ष उपस्थित होने को कहा था लेकिन सचिव उपस्थित नही हुवे और सचिव की ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि इस पीठ के समक्ष धर्मेन्द्र कुमार सिंह , विशेष कार्याधिकारी , लखनऊ विकास प्राधिकरण उपस्थित होंगे लेकिन यह कारण स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें पीठ के समक्ष उपस्थित होने में क्या बाधा थी । पीठ के समक्ष धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि आज सचिव , लखनऊ विकास प्राधिकरण इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में लाटरी आवंटन की प्रक्रिया में व्यस्त हैं , जबकि यह तथ्य प्रार्थना पत्र में नहीं लिखा गया , जो अत्यन्त आपत्ति जनक है,सूत्रों की माने तो मामला जानकीपुरम विस्तार के एक अपार्टमेंट का है आवंटी निर्मला श्रीवास्तव ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया था। मामले में सुनवाई करते हुवे उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार एवं गोवर्धन यादव और राजेंद्र सिंह की पीठ ने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि । दिनांक 23.02.2021 को सुबह 10:30 बजे सचिव , लखनऊ विकास प्राधिकरण व्यक्तिगत रूप से इस पीठ के समक्ष उपस्थित होंगे अन्यथा उनके विरुद्ध गैर जमानती वारन्ट जारी किया जायेगा । साथ ही आयोग ने कहा लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिवक्ता अगली तिथि तक परिवादी द्वारा किये गये प्रत्येक भुगतान को टेबल फार्म में प्रस्तुत करेंगे कि धनराशि कब – कब किस माध्यम से जमा की गयी और प्रश्नगत फ्लैट का प्रारम्भिक मूल्य क्या था और कब – कब इस मूल्य को बढ़ाया गया और आज इस फ्लैट के निर्माण की क्या स्थिति है । इसके अतिरिक्त वे यह भी अवगत करायेंगे कि उपभोक्ता की धनराशि जमा होने पर क्या उसे कई वर्षों तक फ्लैट न देने के कारण उसकी जमा धनराशि पर किसी तरह का कोई व्याज दिया जा रहा है अथवा नहीं । आयोग ने कहा परिवादी भी अपने द्वारा जमा की गयी धनराशि का विवरण अगली तिथि तक उपलब्ध करायेंगे । लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने कहा कि पिछले दिनों रेरा कोर्ट और उपभोक्ता कोर्ट के साथ साथ अन्य अदालतों ने जो प्राधिकरण के खिलाफ उपभोक्ताओं को राहत देते हुवे जनहित में जो निर्णय दिए है उससे प्राधिकरण को सिख लेनी चाहिए और जनहित में कार्य करना चाहिए। उमाशंकर दुबे ने लखनऊ विकास प्राधिकरण पर आरोप लगाते हुवे कहा कि आवंटियों को तो अब मात्र न्यायालय से ही न्याय की उम्मीद है लखनऊ विकास प्राधिकरण अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है।

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