उत्तर प्रदेश

मात्र 50 रुपये के लिए आवंटी को परेशान करना पड़ा भारी,राज्य उपभोक्ता आयोग ने एलडीए पर लगाया भारी अर्थदंड

रिपोर्ट – रामकुमार यादव

राज्य उपभोक्ता आयोग लखनऊ विकास प्राधिकरण पर लगाया भारी अर्थदंड, दिनांक 01-01-2016 से कब्जा दिये जाने के दिनांक तक परिवादिनी को प्राधिकरण 15,000 रू. मासिक बतौर हर्जाना, साथ ही 1.50,000 रू. बतौर क्षतिपूर्ति और मानसिक कष्ट के लिए 1,50,000 रू.एव वाद व्यय के लिए 50,000 रू अदा करना होगा । इसके अतिरिक्त परिवादिनी निर्मला श्रीवास्तव द्वारा जमा की गयी धनराशि पर दिनांक 01-06-2011 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया और कोर्ट ने कहा गया कि यदि 30 दिन के अन्दर उन्हें प्रश्नगत फ्लैट का कब्जा सभी सुविधाओं सहित नहीं दिया गया तब प्राधिकरण को प्रतिदिन 1000 रू दण्ड स्वरूप हर्जाना भी देना होगा ।

लखनऊ – उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने लखनऊ विकास प्राधिकरण पर भारी जुर्माना लगाया है दरसल निर्मला श्रीवास्तव ने वर्ष 2011 में 135 स्क्वायर मीटर का एक फ्लैट सरगम अपार्टमेंट सेक्टर – जे , एक्सटेंशन जानकीपुरम, लखनऊ में 30,90,000 रुपये में बुक कराया था । दिनांक 30-04-2013 तक निर्मला श्रीवास्तव ने 34,04,920 रुपये जमा कर दिया था और उसके बावजूद भी उसे फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया जबकिं वर्ष 2013 में दिये जाने का वादा किया गया था । इसके पश्चात बार – बार निर्मला श्रीवास्तव लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्यालय के चक्कर लगाती रहीं किन्तु उन्हें फ्लैट आवंटित नहीं किया गया । इसके पश्चात् 0.T.S स्कीम के अन्तर्गत उससे रू. 10.29.984.35 पैसे की मांग की गयी थी जबकि उसके द्वारा 10,29,934.35 / -रुपया जमा किया गया । इस तरह उसके द्वारा मात्र 50 / -रू. कम जमा हुआ था और 50 / -रू. कम जमा होने के आधार पर प्राधिकरण ने उसकी 0.T.S स्कीम रद्द कर दिया और उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया । इसके पश्चात् लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अपने एक पत्र में यह माना कि निर्मला श्रीवास्तव ने 441 / -रू जमा किया लेकिन साथ ही साथ प्राधिकरण ने उसके ऊपर फ्री – होल्ड चार्ज 7,771 / -रू का बकाया दिखा दिया और इस प्रकार पुनः उन्हें फ्लैट का कब्जा न देकर उनसे और रूपयों की मांग की गयी । इन सबसे परेशान होकर परिवादिनी निर्मला श्रीवास्तव ने राज्य आयोग के समक्ष परिवाद दायर किया । राज्य आयोग की पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार , सदस्य, राजेन्द्र सिंह, एवं सदस्य, गोवर्धन यादव ने अपना निर्णय देते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण को आदेश दिया कि वह दिनांक 01-01-2016 से कब्जा दिये जाने के दिनांक तक परिवादिनी को प्राधिकरण 15,000 रू. मासिक बतौर हर्जाना अदा करे साथ ही 1.50,000 रू. बतौर क्षतिपूर्ति अदा करे और मानसिक कष्ट के लिए 1,50,000 रू. एवं वाद व्यय के लिए 50,000 रू अदा करे । इसके अतिरिक्त परिवादिनी निर्मला श्रीवास्तव द्वारा जमा की गयी धनराशि पर दिनांक 01-06-2011 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया और कोर्ट ने कहा गया कि यदि 30 दिन के अन्दर उन्हें प्रश्नगत फ्लैट का कब्जा सभी सुविधाओं सहित नहीं दिया गया तब प्राधिकरण को प्रतिदिन 1000 रू दण्ड स्वरूप हर्जाना भी देना होगा ।

राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले का स्वागत करते हुवे लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने कहा कि जनता को न्यायालय से ही न्याय की उम्मीदें है, जनहित में बने प्राधिकरण कहीं न कहीं जनविरोधी कार्य मे संलिप्त हो गए है जिसके कारण उपभोक्ताओं को न्यायालय का सहारा लेना पड़ रहा है। जनता को उचित मूल्य पर घर मिले इसको लेकर प्राधिकरण का निर्माण हुवा था लेकिन आज प्राधिकरण अपने उद्देश्य से भटक गया है। आवंटियों से किये गए वॉयदे पूरे करने के बजाय आवंटियों का शोषण किया जा रहा है।

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