उत्तर प्रदेश

एलडीए में करोङो रुपये भुकतान के बाद भी नही हो रहा रखरखाव

रिपोर्ट – रामकुमार यादव

लखनऊ विकास प्राधिकरण के अपार्टमेंट में रखरखाव के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रस्टाचार को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे है लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रही है लेकिन जब एलडीए वीसी ने टेंडर की जांच शुरु की है तो एक के बाद एक मामला सामने आने लगा है।

नया मामला कानपुर रोड मानसरोवर योजना अंतर्गत लखनऊ विकास प्राधिकरण के सनराइज अपार्टमेंट का है । वर्तमान में उक्त अपार्टमेंट का रखरखाव लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है पिछले 3 दिनों से सनराइज अपार्टमेन्ट के एक टावर में पानी नहीं आ रहा है पाइप टूट गई आवंटी किसी तरह रात में पाइप को जोड़ने का काम कर रहे हैं फिर भी पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है लेकिन जब इसकी सूचना आवंटियों ने रखरखवा देख रहे एलडीए के अभियंता श्री सुरेश कुमार को दी गई तो दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह (स्माइली बनाकर भेज रहे हैं उनकी भाषा है की पट्टी हो रही है क्या )

लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने मामले में एलडीए वीसी से शिकायत कर जांच की मांग की है। महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने कहा कि आवंटियों ने लाखों रुपए लगा कर के लखनऊ विकास प्राधिकरण से फ्लैट खरीदे हैं करोङो रुपए रखरखाव शुल्क दिया जा रहा है और समस्या आने पर जिम्मेदार अधिकारी स्माइली बनाकर भेज रहे हैं स्माइली का मतलब उपरोक्त समस्याओं से वह खुश है ऐसे में मामला बहुत गंभीर है।

इस संबंध में आवंटियों ने लखनऊ जन कल्याण महासमिति से शिकायत की है। उमाशंकर दुबे ने कहा कि रखरखाव के लिए लगभग एक करोड़ रुपए साल का लखनऊ विकास प्राधिकरण ने एक टेंडर दिया है लेकिन जब रखरखाव काम देख रही एजेंसी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनका काम साफ सफाई के साथ साथ कामन एरिया की लाइट ऑन करना, पानी का मोटर ऑन करना आदि है, जबकि उपरोक्त व्यवस्थाओं में कोई भी कार्य वहां नहीं किया जा रहा है। ऐसे में 2 साल का लगभग दो करोड़ रुपए का टेंडर किसी एजेंसी को देना कहीं न कहीं संदिग्ध है और जांच के दायरे में आ रहा है ।

उमाशंकर दुबे ने एलडीए वीसी को दिए शिकायत में कहा है कि अधिशासी अभियंता आनंद मिश्रा और अभियंता एस के जैन एवं जूनियर इंजीनियर सुरेश की भूमिका संदिग्ध है। सनराइज अपार्टमेंट के आवंटियों ने बताया कि अधिशासी अभियंता आनंद मिश्रा से पिछले कई महीनों से इस संबंध में जानकारी मांगी जा रही है कि लगभग दो करोड़ रुपए का टेंडर जिस कंपनी को दिया गया है उसका कार्य क्या है क्योकि उसका कोई कार्य यहां दिखायी नही देता,साफ सफाई होती नही,किसी भी अन्य तरह का रख रखाव होता नही है ऐसे में जिसे आवंटियों के पैसे से करोङो रुपये दिए जा रहे है उस ऐजेसनी द्वारा अपार्टमेंट में न तो कोई कार्य कराए गया और न ही अधिशासी अभियंता आनंद मिश्रा द्वारा एजेंसी के कार्य के संबंध में कोई सूचना दी जा रही है कि उक्त एजेंसी का कार्य क्या है। ऐसे में आवंटियों के द्वारा दिए गए मेंटेनेंस के करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लग रहा है।

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