नई दिल्ली:
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अमेरिकी सांसदों के बीच हुई पुरानी मुलाकात को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने वर्ष 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान राहुल गांधी की कुछ डेमोक्रेट सांसदों से हुई बैठक को हाल ही में सामने आए उमर खालिद से जुड़े पत्र से जोड़ते हुए तीखा आरोप लगाया है।
बीजेपी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ उठने वाले मुद्दों के पीछे एक तय राजनीतिक नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम बार-बार सामने आता है।
बीजेपी प्रवक्ता का दावा, विदेशी मंच पर भारत विरोधी एजेंडा
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें राहुल गांधी अमेरिकी सांसद जेनिस शैकॉस्की और इल्हान ओमार के साथ नजर आ रहे हैं।
भंडारी ने आरोप लगाया कि जब भी भारत सरकार, उसकी नीतियों या आतंकवाद विरोधी कानूनों पर विदेश में सवाल उठते हैं, तो उसी नेटवर्क के चेहरे सामने आते हैं।
बीजेपी नेताओं का दावा है कि यह घटनाक्रम संयोग नहीं, बल्कि एक “सुनियोजित पैटर्न” का हिस्सा है।
उमर खालिद को लेकर अमेरिकी सांसदों का पत्र बना विवाद की वजह
विवाद की जड़ एक हालिया पत्र है, जो आठ अमेरिकी सांसदों ने भारत सरकार को लिखा है। इस पत्र में 2020 दिल्ली हिंसा मामले के आरोपी उमर खालिद को जमानत देने और शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
उमर खालिद पिछले पांच वर्षों से UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत जेल में बंद हैं और उनका मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
बीजेपी ने 2024–2026 की घटनाओं को जोड़ा
बीजेपी नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को एक क्रम में रखते हुए दावा किया है:
- 2024: राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा और जेनिस शैकॉस्की व इल्हान ओमार से मुलाकात
- जनवरी 2025: जेनिस शैकॉस्की द्वारा “Combating International Islamophobia Act” दोबारा पेश किया जाना, जिसमें भारत का नाम शामिल
- दिसंबर 2025: उमर खालिद के समर्थन में भारत सरकार को अमेरिकी सांसदों का पत्र
- 2026: इस पत्र को लेकर भारत की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया
बीजेपी का कहना है कि यह घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
पत्र में क्या कहा गया है
अमेरिकी सांसद जिम मैकगवर्न ने इस पत्र की प्रति सार्वजनिक करते हुए कहा कि उमर खालिद के खिलाफ लगाए गए आरोपों के साक्ष्य कमजोर बताए जा रहे हैं।
पत्र में यह भी कहा गया कि भारत को अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकार संधि के तहत निष्पक्ष और समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों ने उमर खालिद के सह-आरोपियों के लिए भी समान न्याय की मांग की है।
कांग्रेस और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले पर अब तक कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
आगे क्या?
उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है।
वहीं, इस अंतरराष्ट्रीय पत्राचार को लेकर राजनीतिक बहस के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार और विपक्ष दोनों की नजर अब अदालत के फैसले और आगे आने वाली कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हुई है।