कृष्णनगर-में-गरजे-मोदी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के पहले चरण के मतदान के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नदिया जिले के कृष्णनगर पहुँचे और एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। यह वही कृष्णनगर है जो वर्षों से तृणमूल कांग्रेस के कुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ धीरे-धीरे सुलग रहा था। आज उस असंतोष को एक राजनीतिक आवाज़ मिलती दिखी।
लोकतंत्र की वापसी का दावा
मोदी ने मंच से ऐलान किया कि यह बंगाल के पिछले पचास वर्षों का सबसे कम हिंसा वाला चुनाव है। उन्होंने इसका श्रेय चुनाव आयोग को दिया और कहा कि जब भी बंगाल में मतदाता भारी संख्या में घर से निकले हैं, सत्ता परिवर्तन अवश्य हुआ है। शाम पाँच बजे तक राज्य में लगभग नब्बे प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसे मोदी ने “बदलाव का जनादेश” करार दिया।
तृणमूल पर सीधा प्रहार
प्रधानमंत्री ने तृणमूल सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल में कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं होता। पंद्रह वर्षों से चला आ रहा सिंडिकेट राज, कट मनी की संस्कृति और गुंडागर्दी का यह तंत्र अब अपनी समाप्ति की ओर है। उन्होंने कहा — “तृणमूल का एक्सपायरी डेट ४ मई है।”
कृष्णनगर की जनता, जो वर्षों से जवाबदेही की माँग करती आई है, इन शब्दों को सुनकर उत्साहित दिखी। स्थानीय लोगों की शिकायतें पुरानी हैं — सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा दादागिरी, और विरोध की आवाज़ को दबाने की राजनीति। इस असंतोष को भाजपा अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है।
झालमुरी और राजनीतिक व्यंग्य
सभा में एक हल्का पल भी आया। मोदी ने अपनी झारग्राम यात्रा के दौरान झालमुरी खाने की घटना का ज़िक्र किया, जिसे विपक्ष ने खूब तूल दिया था। मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा — “झालमुरी मैंने खाई, लेकिन झाल तृणमूल को लगी है।” भीड़ ने इस पर ज़ोरदार तालियाँ बजाईं।
४ मई का इंतज़ार
पहले चरण में १५२ सीटों पर मतदान हुआ। दूसरा चरण २९ अप्रैल को होगा और मतगणना ४ मई को। मोदी ने विश्वास जताया कि इस बार बंगाल की धरती पर कमल खिलेगा।
कृष्णनगर की जनता ने वोट डाल दिया है। अब देखना यह है कि यह असंतोष केवल भावना बनकर रह जाता है, या ४ मई को एक निर्णायक बदलाव का रूप लेता है।