उत्तर प्रदेश

हाउस टैक्स के नाम पर लखनऊ नगर निगम का बड़ा खेल

विकास के बगैर नही लग सकता हाउस टैक्स, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

लखनऊ – बड़े बड़े सरकारी कार्यालयों, राजनीति पार्टी दफ्तरों और बाहुबलियों से हाउस टैक्स की वसूली न कर पाने वाला नगर निगम इन दिनों अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए गांव में हाउस टैक्स लगाने की तैयारी में है। पिछले दिनों नगर निगम सीमा में आये गावो में नगर निगम ने सर्वे कराना शुरू कर दिया है। जिन क्षेत्र को एलडीए या आवास विकास विकसित कर रहा है कार्य अभी पूर्ण नही है वहा भी सर्वे करके बगैर अपने किसी सहयोग के नगर निगम ने हाउस टैक्स की योजना तैयार कर लिया है । लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने बताया कि लखनऊ नगर निगम में इन दिनों गांवों में हाउस टैक्स लगाने की तैयारी में है।


गोमती नगर विस्तार सहित लखनऊ के कई क्षेत्र जो पिछले दिनों नगर निगम सीमा क्षेत्र में आये है का नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स लगाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है जबकि उक्त क्षेत्र का विकास लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। उमाशंकर दुबे ने मामले में मुख्यमंत्री,नगर विकास मंत्री, महापौर, मंडलायुक्त जिलाधिकारी के साथ साथ नगर आयुक्त से शिकायत की है। भेजें गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि उक्त क्षेत्र नगर निगम को अभी हैंडओवर भी नही हुई हैं ऐसे में नगर निगम हाउस टैक्स कैसे ले सकता है। सरकार ग्रामीण क्षेत्रो के विकास के लिए नगर निगम सीमा में शामिल करती है न कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगो के शोषण करने के लिए।

सरकार ग्रामीण क्षेत्रो के विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्र को नगर निगम सीमा में शामिल करती है लेकिन लखनऊ नगर निगम ग्रामीण क्षेत्रों के विकास ने नाम पर कर रहा ग्रामीणों का शोषण, हाउस टैक्स का नया खेल

नगर निगम लखनऊ ग्रामीण क्षेत्र के लोगो के साथ विकास किये बगैर हाउस टैक्स के नाम पर आर्थिक भार डालने की कोशिश कर रहा है। इतना ही नही उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम- 1959 के सेक्शन 177 ज में साफ लिखा है कि हाउस टैक्स तभी लिया जा सकता जब उक्त क्षेत्र का पूरा विकास जैसे सड़क, सीवर, नाला, बिजली,पानी आदि की व्यवथा हो गयी हो, या फिर नगर निगम सीमा में आये 5 साल हो गया हो जबकिं ऐसी स्थिति में दोनों नही हुवा है। यहां यह भी अवगत कराना है कि उक्त क्षेत्र का विकास लखनऊ विकास प्राधिकरण अभी कर रहा है जिसका विकास शुल्क भी लिया गया है लेकिन अभी तक पूरी तरह से क्षेत्र का विकास नही किया गया है। पानी की सप्लाई नही दी गयी,कई पानी की टंकियां अभी पूर्ण नही है, सड़क छतिग्रस्त है, सीवर की व्यवस्था भी अभी पूर्ण नही है,नाले 95 प्रतिष्ठित से अधिक काम नही कर रहे, नालियों का हाल तो पूरी तरह से ध्वस्त है। बिजली की व्यवस्था कई क्षेत्रों में अभी ओवर हेड से है जबकि उन्हें अंडरग्राउंड किया जाना है।

उपरोक्त तमाम समस्याओं के बीच अधूरे कार्य पूर्ण करते हुवे क्षेत्र का विकास कराकर नगर निगम प्रॉपर हैंडवास लेने के बजाय अनाधिकृत तरीके से नियमविरुद्ध सर्वे कराकर हाउस टैक्स का भार गांव की जनता पर डालना चाहता है।

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