लाइफस्टाइल

स्वस्थ शरीर की जिसने ठानी, यही बेहतर जीवन की निशानी

संसार में प्रत्येक व्यक्ति का खान-पान उसके संस्कार और संस्कृति के अनुसार होता है। खान-पान में युगों से जो पदार्थ प्रयोग किए जाते रहे हैं, आज भी उन्हीं पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन किस पदार्थ को कब व कैसे लेना है और कितना लेना है । यह अधिकतर लोगों को ज्ञात नही है ।यह अवश्य है कि इन विभिन्न खाद्य पदार्थों में कुछ ऐसे हैं जो बहुत फायदेमंद होते हैं, तो कुछ ऐसे जो बेहद नुकसानदायक होते हैं। इसी आधार पर प्राचीनकाल में वैद्यों ने आहार को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बाँटा था
सात्विक आहार
सात्विक आहार ताजा, रसयुक्त, हल्की चिकनाईयुक्त और पौष्टिक होना चाहिए। इसमें अन्न दूध, मक्खन, घी, मट्ठा, दही, हरी-पत्तेदार सब्जियाँ, फल-मेवा आदि शामिल हैं। सात्विक भोजन शीघ्र पचने वाला होता है। इन्हीं के साथ नीबू नारंगी ,लस्सी जैसे तरल पदार्थ बहुत लाभप्रद हैं। इनसे चित्त एकाग्र तथा पित्त शांत रहता है। भोजन में ये पदार्थ शामिल होने पर विभिन्न रोग एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से काफी बचाव रहता है। अब आते है हम दूसरे आहार पर वह है ।

राजसी आहार
इसमें सभी प्रकार के पकवान, व्यंजन, मिठाइयाँ, अधिक मिर्च-मसालेदार वस्तुएँ, नाश्ते में शामिल आधुनिक सभी पदार्थ,जैसा पीजा वर्गर समोसा, चाट शक्तिवर्धक दवाएँ, चाय, कॉफी, कोको, सोडा, पान, तंबाकू, मदिरा एवं व्यसन की सभी वस्तुएँ शामिल हैं। राजसी भोज्य पदार्थों के गलत या अधिक इस्तेमाल से कब, क्या तकलीफें हो जाय और कब किसी भंयकर बीमारी से आप गृसित हो जाय कहा नही जा सकता है
आजकल के परिवेश मे इनसे हालाँकि पूरी तरह बचना तो किसी के लिए भी संभव नहीं, किंतु इनका जितना कम से कम प्रयोग किया जाए, यह किसी भी उम्र और स्थिति के व्यक्ति के लिए लाभदायक रहेगा। वर्तमान में होनेवाली अनेक बीमारियों का कारण इसी तरह का खानपान है, इसलिए बीमार होने से पहले इनसे बचा जाए, वही हमारे शरीर के लिए सबसे बेहतर उपाय है ।

तामसिक आहार
इसमें प्रमुख मांसाहार माना जाता है, लेकिन बासी एवं विषम आहार भी इसमें शामिल हैं। तामसी भोजन व्यक्ति को क्रोधी एवं आलसी बनाता है, साथ ही कई प्रकार से तन और मन दोनों के लिए प्रतिकूल असर डालता है ।
खान-पान की खास बाते को समझना बहुत जरूरी है ।
जब हम जल्दी में हों, तनाव में हों, अशांत हों, क्रोध में हों तो ऐसी स्थिति में भोजन न किया जाए, यही बेहतर है।
आयुर्वेद के अनुसार जो मनुष्य खाना खाता है, शरीर के प्रति उसका कर्तव्य है कि वह व्यायाम अवश्य करें।
बुजुर्गों के लिए टहलना ही पाचन के लिए पर्याप्त व्यायाम है।भोजन ऋतु, स्थान और समय के अनुसार ही करें। बार-बार न खाएँ। यदि समय अधिक निकल जाए तो भोजन न करना ज्यादा अच्छा है।
भोजन के साथ पानी न पीएँ। आधे घंटे पहले और एक घंटे बाद पीएँ।
भूख को टालना ठीक नहीं। यह शरीर के लिए नुकसानदायक है।
दिनभर में इतना काम अवश्य करें कि शाम को थकावट महसूस हो। इससे भूख लगेगी और नींद भी अच्छी आएगी।

हमारा शरीर पांच तत्वों (जल, पृथ्वी, आकाश, अग्नि और वायु) से मिलकर बना है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर का स्वास्थ्य इन तीन चीजों पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है : वात पित्त और कफ। ये तीनों अगर शरीर में संतुलित अवस्था में हैं तो आप स्वस्थ हैं, अगर इनमें से किसी का भी संतुलन बिगड़ा तो रोग उत्पन्न होने लगते हैं. इसी वजह से इन्हें ‘दोष’ कहा गया है। इन दोषों की संख्या तीन होने के कारण ही इन्हें त्रिदोष कहा गया है।
वात दोष – जिसमें वायु और आकाश तत्त्वों की प्रधानता हो|
पित्त दोष – जिसमें अग्नि तत्त्व की प्रधानता हो|
कफ दोष – जिसमें पृथ्वी और जल तत्त्वों की प्रधानता हो|
इन दोषों का प्रभाव न केवल व्यक्ति की शारीरिक संरचना पर होता है बल्कि उसकी शारीरिक प्रवृत्तियों (जैसे भोजन का चुनाव और पाचन) और उसके मन और भावनाओं पर भी होता है| उदाहरण के लिए कफ प्रकृति के असंतुलन से मनुष्य के शरीर का वजन बढ़ा रहता है , उनकी पाचन का अन्य प्रकृति के मनुष्यों की तुलना में धीमा होना, उनकी तेज याददाश्त और भावनात्मक रूप से उनमें स्थिरता का होना पृथ्वी तत्त्व की प्रधानता के कारण होता है। अधिकांश व्यक्तियों की प्रकृति में किन्हीं दो दोषों का संयोग होता है। जैसे पित्त-कफ प्रकृति वाले मनुष्य में पित्त और कफ दोनों दोषों का प्रभाव देखा जाता है पर पित्त दोष की प्रधानता देखी जाती है। अपनी शारीरिक संरचना और प्रकृति के ज्ञान की समझ से हम इन तत्वों को संतुलित और स्वयं को स्वस्थ रखने की दिशा में आवश्यक कदम उठा सकते हैं। कैसा हो हमारा भोजन :-
हमारे शरीर के विकास के लिए प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज आदि की निश्चित मात्रा होनी चाहिए। भोजन में इन सभी पोषक तत्वों से परिपूर्ण संतुलित आहार का सेवन हमें स्वस्थ, बलशाली व बुद्धिमान बनाता है।
भोजन हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। जब हमारे शरीर में भोजन के माध्यम से पोषक तत्व प्रवेश करेंगे, तभी हमारा शरीर बीमारियों का मुकाबला कर पाएगा। कहने का तात्पर्य की हमारा शरीर भी एक तरह की मशीन है यदि हम चाहते है कि यह सही से काम करे तो हमे अपने खान -पान व लाइफ स्टाइल पर विशेष ध्यान देना होगा । तभी हम दीर्घायु व स्वस्थ्य शरीर का सपना देख सकते है । आज कल के परिवेश मे लोगो को यह जानकारी नही है कि हमारे खानपान का तरीका व लाइब स्टाइल कैसी होनी चाहिए । हम सभी लोग शरीर से दिन भर मशीन की तरह काम लेते है लेकिन शरीर रूपी मशीन को कैसे अपने बेहतर खान-पान तरीके से ठीक रखे इस जानकारी का अभाव है , लेकिन विज्ञान इतना आगे बढ़ गया है हर क्षेत्र मे क्रांति आ रही है , इस क्रम मे आज की इस भागा दौड़ी जिंदगी मे देश दुनिया मे खान-पान व बेहतर जीवन शैली कैसे होनी चाहिए इसके लिए भी प्रत्येक शहर मे हर्बल लाइफ न्यूट्रीशन सेण्टर खोले गये है । जहां पर खान-पान के तरीको व लाइफ स्टाइल कैसी हो इसको बेहतर ढंग से बताने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहे हैं । जहां खान-पान व लाइफ स्टाइल के बेहतर तरीके को जानकर अपनी लाइफ स्टाइल व शरीर को स्वस्थ्यचित किया जा सकता है । अधिक जानकारी के लिए आप लेखक से सम्पर्क कर सकते है ।
रामकुमार यादव
919839222293

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