उत्तर प्रदेश

सुशांत गोल्फ सिटी योजना के नक्शे में संशोधन पर दाखिल आपत्ति पर एलडीए करेगा सुनवाई, महासमिति ने उठाये सवाल

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी – लखनऊ अंसल एपीआई टाउनशिप का दायरा 6000 एकड़ से घटाकर 4000 एकड़ करने के प्रस्ताव के मामले में दाखिल आपत्तियो पर एलडीए ने आगामी 14 मार्च को सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित की है ।

लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने एलडीए की भूमिका पर सवाल उठाते हुवे कहा कि एलडीए के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट के संशोधित डीपीआर की कॉपी तक उपलब्ध नही कराया, साथ ही दाखिल आपत्तियो पर शिकायतकर्ताओं को अलग अलग समय पर बुलाया जा रहा है जबकिं अबतक जब भी कोई आपत्ति मांगी जाती है तो उसपर सुनवाई एक साथ होती है।

उमाशंकर दुबे में कहा सुशांत गोल्फ सिटी के नए डीपीआर में ग्रीन बेल्ट, पार्क से ओपन एरिया और सड़कों की चौड़ाई तक कम करने का प्रस्ताव है । इतना ही नही सड़क हटाकर प्लाटिंग करने का भी नए डीपीआर में प्रस्ताव है। उमाशंकर दुबे ने बताया कि एलडीए की वेबसाइट में लेआउट की कॉपी तो देखने को मिल गई , लेकिन डीपीआर की कॉपी आज तक उपलब्ध नहीं कराया जाना एलडीए की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।

एलडीए ने टाउनशिप के संशोधित डीपीआर और लेआउट पर आपत्ति सुझाव मांगते हुए विज्ञापन प्रकाशित किया था जिसके आधार पर लखनऊ जनकल्याण महासमिति और अंसल की आरडब्ल्यूए सहित कई अन्य आरडब्ल्यूए ने आपत्ति दाखिल किया था, जिन्हें 14 मार्च 2022 को सुनवाई के लिए एलडीए ने बुलाया है लेकिन सबको अलग अलग समय पर सुनवाई के लिए बुलाया गया है, जो अपने मे एलडीए और अंसल की भूमिका पर सवाल खड़े करता है ।

उमाशंकर दुबे ने बताया कि नए डीपीआर में ग्रीनवेट को कम कर दिया गया साथ ही एसटीपी जैसी जरूरी सुविधाएं अभी तक आवंटियों के लिए शुरू नही की गई जो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का खुला उलंघन है और इसके लिए कानून में जुर्माने के साथ साथ दंड तक का प्राविधान है ।

आवंटियों की सुविधा के लिए अंसल को ही 220 केबीए का पावर सबस्टेशन बनाना था लेकिन उसे भी अभी तक तैयार नही किया गया, साथ ही 5 साल का एक्सटेंशन मिल रहा है लेकिन जो वर्षो से आवंटी अपने घर का सपना देख रहे है पैसे देने के बावजूद आज तक उन्हें उनका अधिकार नही मिला। आज भी वह आवंटी पैसे देने के बावजूद कभी एलडीए तो कभी अंसल आफिस में अपने सपनो के घर के लिए चक्कर लगाते है लेकिन उन्हें उनका अधिकार नही मिल रहा। उन्हें इस नए डीपीआर में स्थान नही दिया गया है।

नए डीपीआर में 24 मीटर की सड़क पर प्लाटिंग दिखाया गया है जबकि वहाँ मौके पर न सिर्फ सड़क बनी है बल्कि बड़े बड़े पेड़ पौधे भी लगे हुवे है। उमाशंकर दुबे ने आरोप लगाते हुवे कहा कि नए डीपीआर को गोपनीय रखना कही न कहीं एलडीए और अंसल दोनों की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।

उमाशंकर दुबे ने कहा सबसे बड़ी बात अंसल कोर्ट के आदेश का भी पांलन नही कर रहा क्योकि सेक्टर C- 6 में स्टेडियम और स्पोर्ट काम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव था लेकिन 2015 के डीपीआर में बदल दिया गया हलाकि डीपीआर में इसे शिफ्ट करना बताया गया लेकिन कहा शिफ्ट किया जा रहा है इसे नही दिखाया गया।

पिछले दिनों आवंटियों की शिकायत पर रेरा कोर्ट ने भी अंसल को आदेश दिए थे कि जगह चिन्हित करके स्टेडियम और स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स बनवाएं लेकिन वर्तमान डीपीआर में इसका भी कोई जिक्र नही है ऐसे में रेरा न्यायालय के आदेश का भी उलंघन है ।

इतना ही नही सेक्टर C – 7 में अंसल ने टूरिस्ट लेज़र जोन बनाने का वायदा किया था जिसे 2015 के डीपीआर में शामिल ही नही किया जबकिं इस मामले में भी रेरा कोर्ट ने टूरिस्ट लेजर जोन बनाने को कहा था लेकिन वर्तमान डीपीआर में इसका भी जिक्र नही है।

उमाशंकर दुबे ने अंसल और एलडीए की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुवे कहा कि आगामी 14 मार्च को एलडीए में उपरोक्त आपत्तियो के अलावा सुशांत गोल्फ सिटी के डीपीआर में कई अन्य खामियां है जिसपर विस्तार से न सिर्फ चर्चा होगी बल्कि सभी मुद्दों को महासमिति मजबूती से उठाएगी और सुशांत गोल्फ सिटी के आवंटियों के हितों को देखते हुवे जनहित में उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करेगी।

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