उत्तर प्रदेश

समाजकल्याण विभाग ने नकारा तो,लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने दिया बुजुर्गों को सहारा

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी

रिपोर्ट – विवेक शर्मा

लखनऊ – जिसके कंधे पर बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी हो यदि वही अपने जिम्मेदारी से भाग जाए तो आखिर बेसहारा का सहारा कौन बनेगा ? यह सिर्फ सवाल नही है बल्कि समाज की एक बड़ी समस्या है। ऐसे में यदि सरकारी विभाग ही अपनी जिम्मेदारी से मुह मोड ले तो निश्चित रूप से समाज को ही आगे आना होगा।

मामला समाज कल्याण विभाग से संबंधित है। कोरोना काल मे वृद्धाश्रमों में कोई सुविधा न होने और असहाय बुजुर्गों के लिए कोई देखभाल न होंने का आरोप लगाते हुवे लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी लेकिन मामलें की जिम्मेदारी देख रहा समाज कल्याण विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के बजाय मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपनी जिम्मेदारी से ही पल्ला झाड़ लिया। महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने बताया कि जब समाज कल्याण विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ दिया तो महासमिति ने खुद जिम्मेदारी उठा ली है और जनसहयोग और विभिन्न विभागों से सहयोग लेकर इनकी मदत की जा रही है।

राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज लखनऊ के प्रधानाचार्य प्रकाश चंद्र सक्सेना से सम्पर्क करके आज समर्पण बृद्धाश्रम में आयुर्वेदिक काढ़ा, दवाइयां आदि औषधि वितरित कराया गया जिससे वृद्धावस्था में बुजुर्गों में इमन्युटी बनी रहे साथ ही महासमिति की तरफ से मेडिकल कीट की व्यवस्था की गई है जिससे थरमामीटर, प्लस ऑक्सिमिटर, मास्क, सेनेटाइजर, पैरासिटामोल और विटामिन की दवाइयां शामिल है।

साथ ही इस वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के हाल चाल लेते रहने की जिम्मेदारी महासमिति के उपाध्यक्ष विवेक शर्मा को दी गयी है। उमाशंकर दुबे ने बताया कि यह हाल केवल सरकारी फंडिंग वृद्धाश्रमों की ही नही है बल्कि पेड़ वृद्धाश्रमों में भी मोटी रकम देने के बावजूद कोई व्यवस्था नही हो रही है।

समर्पण वरिष्ठजन परिसर,आदिल नगर,राम धर्म कांटा के पास,कल्याणपुर, लखनऊ में चल रहे वृद्धाश्रम तो एक उदाहरण है। यहां कुल 40 वरिष्ट नागरिक रहते है, यह सभी वह लोग है जो या तो बड़े बड़े पदों पर रहे है और आज उनका कोई नही है और वह पैसे देकर यहां रहते है, दूसरे वह लोग यहां रहते है जिनके बच्चे विदेशो में है या बाहर है वह अपने परिजनों को यहां पैसे देकर रखे हुवे है लेकिन आज कोरोना काल मे उन्हें कोई दवा की जरूरत हो तो भी उन्हें खुद का ही सहारा लेना पड़ता है, यहां न तो प्रबंधन की तरफ से कोई व्यवस्था है और न ही सरकारी स्तर से सेनेटाइजेसन फॉगिंग आदि की कोई व्यवस्था है।

इतना ही नही इनके कोविड जांच आदि की भी कोई अलग से व्यवस्था नही है जिससे इन बुजुर्गों को कोई मदत मिल सके। महासमिति की शिकायत पर समाज कल्याण विभाग ने जबाब देकर खानापूर्ति कर दिया कि यह उनकी जिम्मेदारी नही है। तदोपरांत महासमिति ने सभी बृद्धाश्रमो का सहारा बनने का निर्णय लिया है। उमाशंकर दुबे ने कहा लखनऊ के अन्य सभी बृद्धाश्रमो मे भी यह व्यवस्था दी जाएगी।

महासमिति ने राज्य आयुवैदिक मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रकाश चंद्र सक्सेना, डॉक्टर मिथिलेश वर्मा, डॉक्टर संदीप कुमार द्विवेदी, डॉक्टर राकेश कुमार और डॉक्टर वासु सिंह सहित राज्य आयुर्वेदिक कालेज और हॉस्पिटल लखनऊ की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया है जिन्होंने महासमिति के निवेदन पर आज बुजुर्गों की इमन्युटी सही रहे के उद्देश्य से आज औषधि वितरित किया है

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