उत्तर प्रदेश

पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति से बचने के लिए लखनऊ की सफाई व्यवस्था देख रही चाइनीज कंपनी इकोग्रीन एनर्जी लखनऊ प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ नगर निगम के खिलाफ पहुँची कोर्ट

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी

लखनऊ में कूड़े का घर घर से संग्रहण और परिवहन के पश्चात प्रसंस्करण , निस्तारण एवं प्रबंधन न कर पाने के कारण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लगी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति से बचने के लिए नगर निगम के ख़िलाफ़ सफाई एजेंसी इकोग्रीन कोर्ट पहुँची है। लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने बताया कि लखनऊ में कूड़े के निस्तारण में लापरवाही के कारण शिवरी ,मोहान रोड प्लांट पर लगे कूड़े के ढेर को देखते हुवे उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण ने पिछले दिनों पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लिए नगर निगम पर 14.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था ।

वही इस जुर्माने को लखनऊ नगर निगम ने कूड़े के प्रबंधन का कार्य देख रही इकोग्रीन कंपनी पर लगा दिया था। इतना ही नही लापरवाही के कारण नगर निगन ने इकोग्रीन पर 2.2 करोड़ रुपये का पुनः अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया लेकिन चाइनीज कंपनी इकोग्रीन पर कोई असर नही हुवा और आज भी कूड़े का प्रसंस्करण एवं निस्तारण नही किया जा रहा और व्यवस्था ध्वस्त है। शिवरी प्लांट पर जहां एक तरफ कूड़े से बिजली बनाने का अनुबंध था ऐसे हालात में बिजली बनाना तो दूर उंसके यंत्र तक नही लगे और आज कूड़े का ढेर लगा हुवा है।

सबसे बड़ी बात व्यवस्था में सुधार करने और जुर्माना देने के बजाय इकोग्रीन अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए न्यायालय पहुच गया है। उमाशंकर दुबे ने बताया कि नगर निगम के विश्वसनीय सूत्रों ने लखनऊ जनकल्याण महासमिति को इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुवे बताया कि इकोग्रीन ने नगर निगम के खिलाफ लगभग 400 पेज की पेटीशन फ़ाइल तैयार करके व्यावसायिक न्यायालय में दाखिल किया है ,जिसमे 240 पेज का नगर निगम का एग्रीमेंट शामिल है।
एग्रीमेंट में आर्बिटेशन क्लॉज है और उसी का सहारा लेकर इकोग्रीन कोर्ट गया है। दरजल सेक्शन 9 के तहत जिला जज को सुनने का अधिकार होता है और उसी के तहत इकोग्रीन ने कोर्ट का सहारा लिया है । इकोग्रीन ने कोर्ट से अपील किया है कि जो जुर्माना लगा है उसे रोक दिया जाय। मामले में लखनऊ में कमर्शियल कोर्ट में न्यायाधीश रामपाल सिंह द्वितीय आगामी 17 फरवरी 2022 को मामले की सुनवाई करेंगे ।

लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने बताया कि मामले में लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने महासमिति के कानूनी सलाहकारों से सुझाव मांगे है कि उपरोक्त मामले में महासमिति न्यायालय में उपरोक्त बिंदुओं को लेकर मुकदमें में कैसे शामिल हो सकती है । उमाशंकर दुबे ने कहा कि इकोग्रीन ने नगर निगम को जरूर पार्टी बनाया है लेकिन मामला जनहित का है और जनता के टैक्स के पैसे का सुविधाएं देने के बजाय भ्रस्टाचार हो रहा है।

उमाशंकर दुबे ने बताया कि लखनऊ में सफाई व्यवस्था के साथ कूड़े के प्रबंधन और प्रसंस्करण का काम करने के बजाय चाइनीज कंपनी इकोग्रीन ने अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुवे, पर्यावरण क्षतिपूर्ति न देना पड़े, इस लिए मामले में जुर्माना से बचने के लिए व्यवसायिक न्यायालय में नगर निगम के खिलाफ मुकदमा दाखिल कर किया है। उमाशंकर दुबे ने बताया कि पिछले 2 सालों से लखनऊ जनकल्याण महासमिति साफ सफाई को लेकर चाइनीज कंपनी के ख़िलाफ़ आवाज उठा रही है उस समय यही नगर निगम के अधिकारी चाइनीज़ कंपनी को संरक्षण देने का काम करते थे आज इकोग्रीन ने अपने निजी लाभ के लिए नगर निगम को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।

उमाशंकर दुबे ने नगर निगम से मांग की है कि लखनऊ में सफाई व्यवस्था के साथ कूड़ा निस्तारण में विफल चाइनीज कंपनी इकोग्रीन के ख़िलाफ़ नगर निगम को अभी भी वक्त है कार्यवाही करते हुवे उसे ब्लैकलिस्ट करना चाहिए।

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