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नगर निगम लखनऊ की लापरवाही से लखनऊ में बदहाली पर आशु बहा रहा प्रधानमंत्री का स्वक्षता अभियान

लखनऊ नगर निगम की हकीकत

स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार ऊंची छलांग लगा कर देश मे 12वे स्थान पर पहुचने वाले लखनऊ की हकीकत देखिए। क्या कर रहा है नगर निगम।सर्वेक्षण में लखनऊ की रैंकिंग सुधरने के बाद जिम्मेदारी और बढ़ गयी लेकिन यह अधिकारी है जैसे सुधरने का नाम न लेने की ठान रखे हो। यह तस्वीर आज की ताजी तस्वीर है। सरकार ने ECO ग्रीन संस्था को कूड़े से बिजली बनाने की जिम्मेदारी दे रखी है जिससे एक तरफ कूड़े का डिस्पोजल हो सके दूसरे बिजली बनाई जा सके लेकिन बिजली बनानां तो दूर उंसके यंत्र तक नही लगे जिससे बिजली बननी थी। कूड़े से बिजली बनाने की परियोजना जो लखनऊ के सिवरी प्रोसेसिंग प्लांट पर स्थापित होनी थी आज हालात है कि सिवरी पर इतने कुडा इकट्ठा हो गए है जो खुद में एक मुसीबत बन गए हैं। कूड़े का ढेर बनता जा रहा है हालात यह है कि घंटो कूड़े की गाड़ी को अपनी गाड़ी का कुडा खाँली करने में लगता है और ध्यान देने वाली बात है पोकलैंड से जुगाड़ करके कुडा डाला जा रहा है लेकिन सोचने वाली बात यह है कि यह सब कबतक चलेगा। कूड़े से निकलने वाला लीचेत बहता जा रहा है। जल और वायु दोनों प्रभावित हो रहे है। इस सम्बंध में यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2 पार्ट में मिलाकर लगभग 40 लाख रुपये नगर निगम पर जुर्माना भी लगा रखा है लेकिन नगर निगम उसे न तो जमा कर रहा है और न ही व्यवथा में सुधार के लिए कोई पहल कर रहा। नगर निगम सूत्रों की माने तो नगर निगम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जबाब दिया है कि गलती उनकी नही ECO ग्रीन एजेंसी की है तो जुर्माना उंससे लिया जाय। अब सवाल है गलती ECO ग्रीन की है तो उसे ब्लैकलिस्ट क्यो नही किया जा रहा यह अपने मे बड़ा सवाल है। आखिर कबतक एक दूसरे के कंधे पर जिम्मेदारी देकर बचने का काम किया जाएगा ।

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