उत्तर प्रदेश

जनेश्वर मिश्र पार्क में कार्पस फंड का दुरुपयोग, ठेके के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप, रखरखाव के नाम पर बदहाल पार्क, महासमिति

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी

लखनऊ गोमती नगर विस्तार के जनेश्वर मिश्र पार्क में रख रखाव के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने कहा कि जनेश्वर मिश्र पार्क में कार्पस फंड का दुरुपयोग हो रहा है।

ठेके के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुवे उंन्होने कहा एलडीए पैसे तो बढ़ा कर दे रहा पैसे तो दे रहा लेकिन रखरखाव के नाम पर पार्क बदहाल है। इस सम्बंध में लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने मुख्यमंत्री से शिकायत की है।

उमाशंकर दुबे ने आरोप लगाते हुवे कहा कि पार्क में ठेके को लेकर वित्तीय अनियमितता का मामला लखनऊ जनकल्याण महासमिति के सज्ञान में लाया गया है। जो तथ्य सामने आए है उस सम्बंध में मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उमाशंकर दुबे ने कहा कि वर्ष 2018 में लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा पहली बार पार्क के अनुरक्षण का कार्य शुरू किया गया।

इससे पहले तक पार्क निर्माणाधीन के नाम पर रखरखाव किया जाता था। उमाशंकर दुबे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया ही कि महासमिति के सज्ञान में लाया गया है कि रखरखाव की शुरूआत के समय पार्क को 4 भागों में बांट दिया गया।

भाग एक के रखरखाव की जिम्मेदारी समिति के कर्मियों को को दिया गया, तो वही भाग 2,3 और 4 को निजी ठेकेदार को दिया गया उस समय ठेका मूल्य भाग 2- का 74 लाख, भाग- 3 का 82 और भाग 4 का 84 लाख के आस पास था जो 1 साल के लिए अलग अलग ठेकेदारों को 32% कम मूल्य पर दिया गया।

जिसे वर्ष 2018-2019 में पुनः ठेके के माध्यम से निविदा निकला गया तो 42.5% कम मूल्य से ठेका दिया गया। इन सबके बीच असली खेल तब शुरू हुवा जब भाग एक जो समिति के कर्मचारियों को दिया गया था उसे उनसे लेकर 2 वर्ष के लिए निविदा मांग लिया गया और पूरे मूल्य पर 2 साल के लिए ठेका दे दिया गया, अब सवाल यही से शुरू हो जाता है कि जब 1 साल के लिए भाग-2, भाग -3 और भाग 4 का ठेका उठाया गया और वर्तमान में 42.5% कम मूल्य पर लोग उसी काम को करने को तैयार है तो 2 साल का ठेका पूरी कीमत पर क्यो दिया गया ।

आरोप है कि अब इसी से एलडीए में भ्रष्टाचार का एक बड़ा रास्ता खुल गया। फिर क्या शुरू हो गया 2 साल के ठेके का खेल, भाग 2 का 1 करोङ 10 लाख, भाग 3 – का – 1 करोङ 15 लाख और भाग – 4 का 1 करोङ 16 लाख का 2 साल के लिए ठेका निकाल दिया गया।

यह सिर्फ ठेका नही निकाला गया बल्कि अपने चहेते ठेकेदारों को ठेका देने के लिए सभी नियम कानून तोड़ दिए गए। फिर वही खेल टेक्निकल टेंडर गिरा देना आदि का खेल शुरू हो गया, मामले में शिकायत हुई, जांच शुरू ही गई और फ़ायनली जांच में जांच अधिकारी ने गड़बड़ी पकड़ा और 2 विकल्प दिए, जांच अधिकारी ने कहा कि या तो दूसरी फर्म को भी तकनीकी रूप से सही करते हुवे वित्तीय टेंडत खोला जाय या फिर पुनः निविदा आमंत्रित किया जाय।

विभाग जानता था यदि दूसरी फर्म का वित्तीय टेंडर खोल देंगे को जिसे चाहते थे उसे टेंडर नही दे पाएंगे, क्योकि उन्हें पता था दूसरे का रेट कम है, इस लिए दूसरे विकल्प को एलडीए ने पसंद किया और दोनों फर्मों की प्रोफाइल देखने के बाद एलडीए ने अपने चहेते को टेंडर देने के लिए टेंडर के नियम भी बदल दिए।

फिर खुद के बनाये अनुभव प्रमाण पत्र से फार्म को लाभान्वित करने का खेल शुरू कर दिया। सवाल यह भी है कि जो फर्म अबतक 42.5% कम मूल्य 1 साल के लिए पर काम कर रही थी उसे 25% कम मूल्य पर काम करने के लिए 2 साल का ठेका देने की योजना बना डाला।

बताते है सब ठेके के माध्यम से किया जा रहा लेकिन जिसे चाहो ठेका देना उसे देकर रहेंगे जिसे नही देना है उसे तकनीकी में फेल कर देने का खेल आज ई-टेंडरिंग के जमाने के जारी है। इस प्रकार यदि देखा जाय तो सिर्फ जनेश्वर मिश्र पार्क में लगभग 4 करोङ का टेंडर है जिसे यदि पूर्व की तरफ 42.5% की दर पर ही माना जाय जिसे 2 साल के नाम पर 25% कम दर पर अपने चहेतों तो देने की शिकायत है यदि यह जांच में भी सही साबित होता है तो सीधे सीधे प्राधिकरण का जनता के पैसे का मेंटिनेंस के नाम पर 17.5% का भ्रष्टाचार सामने आएगा।

यहां सवाल यह भी है कि जब 1 साल का ठेका 42.5% के कम दर पर चल रहा है तो उसी काम को प्राधिकरण भाग एक के ठेके को पूरे पैसे में 2 साल के काम के नाम पर क्यो दिया ? वही 2 साल के नाम पर इस समय भाग -2,3 और 4 में 17.5% बढ़ाकर 25% कम दर पर क्यो देना चाहती है वह भी नियम विरुद्ध तरीके से अपने मनमाफिक टेंडर के नाम पर।

इस तरह का खेल एलडीए में क्या फिर कुछ अभियंताओं के माध्यम से किया जा रहा है या कुछ बड़े अधिकारी भी शामिल है यह भी लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सवाल खड़े किए है और मामले की जांच की मांग की है। जबकिं उन हालात में जब जनेश्वर मिश्र पार्क में रखरखाव के नाम पर भारी अनियमितता है।

साथ मे जनेश्वर मिश्र पार्क की बदहाली के कुछ फोटो भी उमाशंकर दुबे ने मुख्यमंत्री को भेजते हुवे लिखा है कि एलडीए पैसे तो दे रही है लेकिन सफाई रखरखाव का हाल बदहाल है।

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