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गैर जमानती वारंट के भय से एलडीए सचिव एक घंटे पहले पहुचे राज्य उपभोक्ता फोरम, सचिव ने कहा हुजुर एलडीए को रखिए जिंदा तो कोर्ट ने कहा आवंटी का उत्पीड़न नही होगा बर्दाश्त

लखनऊ – विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीति , बोले राम सकोप तब भय बिनु होय न प्रीति। यह दोहा रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने लिखा था। यह वर्तमान में लखनऊ विकास प्राधिकरण पर चरितार्थ हो रहा है। इसी फार्मूले पर राज्य उपभोक्ता फोरम में आज एलडीए सचिव उपस्थिति हुवे दरसल पिछले दिनों कोर्ट ने एलडीए वीसी को तलब किया था। दरसल जानकीपुरम विस्तार में सरगम अपार्टमेन्ट की योजना वर्ष 2011 में शुरू की गई थीं उस समय फ्लैट की कीमत लगभग 30 लाख 90 हजार थी जिसे 24 माह में बना कर देना था लेकिन वर्ष 2013 में देने के बजाय 5 साल और लग गए।

मामले में वर्ष 2020 में प्राधिकरण ने आवंटी से रुपया 10,29,984.35 लेने थे लेकिन 10,29,934.35 जमा हुवा कुल 50 रुपये की वजह से लगभग 22 हजार रुपये से अधिक देना पड़ रहा है, कारण OTC स्कीम के बजाय क़िस्त में बदल गया। कुल मिलाकर लगभग 30 लाख के फ्लैट के सापेक्ष 45 लाख से अधिक ले लिया फिर भी अभी तक आवंटी की रजिस्ट्री नही हुई।

मामले में शुनवाई करते हुवे पीठ ने कहा आवंटी चूकि काफी बुजुर्ग है ऐसे में आवंटी के परिजन मौके पर जाकर वहां की सुविधाओं के बारे में देखे, हालात क्या है अवलोकन करें की परियोजना की क्या स्थिति है, साथ ही मामले की सुनवाई 8 मार्च 2021 को सुबह 10 बजे होगी जिसमें तय किया जाएगा कि प्रोजेक्ट में देरी के साथ साथ आवंटी के मानसिक शारिरिक और आर्थिक हरासमेंट के मामले में प्राधिकरण पर किंतना अर्थदंड लगाया जाय,लखनऊ विकास प्राधिकरण पर जुर्माना लगता देख एलडीए सचिव में कहा हुजूर ऐसा न करे एलडीए को जिंदा रखे तो कोर्ट ने कहा आबंटियो के साथ लगातार धोखा हो रहा, सचिव खुद जाए अपनी सभी परियोजनाओं को देखे की कैसे जनता को न्याय दे सकते है। गौरतलब है कि ओ0 टी0 एस0 के अन्तर्गत रुपया 10,29,984.35 पैसा जमा करना था , जबकि धनराशि रुपया 10,29,934.35 पैसा जमा किया गया है ।

मात्र 50.00 रुपये की कमी के कारण उपभोक्ता प्रताडित हो रहा है । इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने सचिव, लखनऊ विकास प्राधिकरण दिनांक 12.02.2021 को सुबह 10.30 बजे इस सम्बन्ध में पीठ के समक्ष उपस्थित होने को कहा था लेकिन सचिव उपस्थित नही हुवे और सचिव की ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि इस पीठ के समक्ष धर्मेन्द्र कुमार सिंह , विशेष कार्याधिकारी , लखनऊ विकास प्राधिकरण उपस्थित होंगे लेकिन यह कारण स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें पीठ के समक्ष उपस्थित होने में क्या बाधा थी । पीठ के समक्ष धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने बताया था कि सचिव , लखनऊ विकास प्राधिकरण इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में लाटरी आवंटन की प्रक्रिया में व्यस्त हैं , जबकि यह तथ्य प्रार्थना पत्र में नहीं लिखा गया , जो अत्यन्त आपत्ति जनक है, कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और कहा था कि दिनांक 23.02.2021 को सुबह 10:30 बजे सचिव , लखनऊ विकास प्राधिकरण व्यक्तिगत रूप से इस पीठ के समक्ष उपस्थित होंगे अन्यथा उनके विरुद्ध गैर जमानती वारन्ट जारी किया जायेगा ।

साथ ही आयोग ने कहा था कि लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिवक्ता अगली तिथि तक परिवादी द्वारा किये गये प्रत्येक भुगतान को टेबल फार्म में प्रस्तुत करेंगे कि धनराशि कब – कब किस माध्यम से जमा की गयी और प्रश्नगत फ्लैट का प्रारम्भिक मूल्य क्या था और कब – कब इस मूल्य को बढ़ाया गया और आज इस फ्लैट के निर्माण की क्या स्थिति है । इसके अतिरिक्त वे यह भी अवगत करायेंगे कि उपभोक्ता की धनराशि जमा होने पर क्या उसे कई वर्षों तक फ्लैट न देने के कारण उसकी जमा धनराशि पर किसी तरह का कोई व्याज दिया जा रहा है अथवा नहीं । आयोग ने कहा था कि परिवादी भी अपने द्वारा जमा की गयी धनराशि का विवरण अगली तिथि तक उपलब्ध करायेंगे ।

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