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गरीबो के घर पर एलडीए की टेढ़ी नज़र, अमीरों पर एलडीए की कृपा जारी, एलडीए भूल गया सरकार का शासनादेश

प्रमुख सचिव का आदेश ही भूल गया एलडीए

गरीबो के घर पर एलडीए की टेढ़ी नज़र

लखनऊ – ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी – एक तरफ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री चाहते है हर किसी का अपना घर हो, सरकार लोगों को अपना घर मुहैया कराने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, वही एक गरीब व्यक्ति किसी तरह आवासीय जमीन में घर बना कर अपने जीवन में मकान का सपना पूरा करना चाहता है तो एलडीए की उसपर नजर टेढ़ी हो जाती है और उसपर एलडीए अपना बुलडोजर चला देता है।

पूरे लखनऊ में लाखों की संख्या में बड़े बड़े अनाधिकृत निर्माण, आवासीय में व्यवसायिक कार्यो को रोकने के बजाय गरीबो का घर गिराना अपने मे एलडीए की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।


दरसल लखनऊ के लौलाई गांव के निवासी रामविलास और रामदास ने अपनी जमीन का 143 करा कर अपनी जमीन का कुछ टुकड़ा 3 लोगो को इस आसय से बेचा उनका भी अपना घर बन सके। लौलाई गांव में लगभग 600 स्क्वायर फिट का आवासीय गाटा नम्बर 163 है जिसमे रामविलास और रामदास ने 3 लोगो को लगभग 600/600 स्क्वायर फिट जमीन बेचा जिसमे B1 – संतोष तिवारी 600 स्क्वॉयफीट, C1- बंदना श्रीवास्तव 640 स्क्वॉयफीट औऱ C2- मोहिनी श्रीवास्तव 640 स्क्वॉयफीट जमीन खरीद कर अपना मकान बनाया।

अब सवाल यह है यदि अनाधिकृत था तो मकान गलत बन रही थी तो एलडीए के अधिकारी क्या कर रहे थे? जबकिं यह मकान 3 से 4 साल पुराना देखने मे लग रहा है । सबसे खासबात यह है कि एलडीए इन्हें कोई नोटिस तक नही दिया जिनके नाम रजिस्ट्री हुई है या जिन्होंने रजिस्ट्री किया है। यदि एलडीए ने नोटिस दिया है तो उसे सार्वजनिक क्यो नही किया जा रहा है। उपरोक्त तीनो के नाम कब नोटिस जारी किया गया।

लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने बताया कि महासमिति को सूचना दी गयी है कि एलडीए अपने चहेती के कहने पर इन मकानों को गिराने का काम किया है।,

इतना ही नही लौलाई में लगभग 6 हजार से अधिक घर बने हुवे है जिसमे 1 हजार से अधिक व्यवसायिक भवनों का निर्माण कर व्यवसाय किया जा रहा है आखिर इतने बड़े बड़े बंगलो के बीच मात्र 600 स्क्वाफिट का मकान जिसने अपने जीवन की पूंजी लगा कर बनाया है उन्हें कैसे गिरा दिया गया।

महासमिति उस पूरे मामले में पीड़ितों के साथ है। उमाशंकर दुबे ने कहा कि लगभग 3 साल पहले 09 अगस्त 2018 प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण ने अनाधिकृत कालोनियों के सम्बंध में स्प्ष्ट आदेश दिए थे लेकिन एलडीए सरकार के आदेश का पालन कराने में नाकामयाब साबित हो रही है।

उमाशंकर दुबे ने कहा अगर उपरोक्त पीड़ित कानूनी लड़ाई लड़ना चाहेंगे तो वह अपने निजी आर्थिक सहयोग से इन गरीबो की कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

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