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कोरोना काल मे स्वास्थ्य बीमा की हकीकत

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी

स्वास्थ्य बीमा के नाम पर बड़े बड़े वॉयदे किये जाते है, आज भी आपको कोरोना काल मे अलग अलग कमापनियों से स्वास्थ्य बीमा के लिए फोन आते होंगे,कोविड को भी कंपनियों ने अपने बीमा में शामिल कर लिया लेकिन सबके बड़ा सच यह है कि लोग बीमा लेकर भी इलाज़ के अभाव में दुनिया छोड़ दिये ऐसे में उस बीमा का क्या जो लाखो लोगों के पास तो है लेकिन इलाज़ नही हो रहा। यहां यह भी बताना जरूरी होगा कि स्वास्थ्य बीमा लेते समय ग्राहक को जीएसटी भी 18% देना पड़ता है जीएसटी का मतलब तो आप सभी ही होंगे, GST यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स। ये टैक्स तब लगता है जब हम किसी प्रोडक्ट या सर्विस को खरीदते हैं। इस तरह से जीएसटी हमारे ऊपर लगने वाला Indirect Tax है। अब हम बात करते है गुड्स एंड सर्विस टैक्स जो राज्य और केंद्र सरकार की होती है हम जिस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा लेते है उन्हें तो पैसे देते ही है उसमे एजेंट से लेकर अन्य सलाहकारों और कर्मचारियों के पैसे छिपे होते है साथ मे सरकार का जीएसटी अलग से शामिल होता है लेकिन हालात यह है कि जीएसटी देने के बावजूद सुविधाएं नही मिलता ग्राहक के साथ धोखा नही है। अब आप जरा गौर से सोचिए यदि हम किसी सुविधा के लिए पैसे देते है और उसकी सेवा न मिले तो उसके लिए हमे क्या करना चाहिए। अब जरा सोचिए हम किस दिन के लिए बीमा कराते है, मोटी रकम साल का देते की हम और हमारा परिवार सुरक्षित रहे और अगर कभी जरूरत पड़े तो बीमा कंपनी बड़े बड़े हॉस्पिटलों में इलाज़ कराएगी,इतना ही नही बीमा कंपनियां बड़े बड़े हॉस्पिटलों की कैशलेस स्कीम के तहत लिस्ट भी ग्राहको को जारी करती है कि यदि हमारी कंपनी से बीमा कराते है तो, बीमारी के हालात में निम्नलिखित हॉस्पिटलों में इलाज़ होगा और पैसे भी देने होंगे। कोविड को भी उसमे शामिल किया गया जिसके लिए अलग से प्रीमियम लिया गया लेकिन क्या हुवा वह वायदा ?

इस सम्बंध में ग्राहक को उपभोक्ता फोरम का सहारा लेना चाहिए और अपने अधिकरियों के लिए आवाज उठाना चाहिए। खैर यह तो एक अलग अपने अधिकारों की लड़ाई है लेकिन सोचने वाली बात है आखिर उस बीमा का क्या हाल इस कोरोना काल मे जिसके लिए जनता ने अरबों खरबों रुपये दिये है और उसका लाभ मिलना तो दूर उन्हें उसकी सुविधाएं तक नही मिल रही है यह एक बड़ा सवाल है उन बीमा कंपनियों के साथ साथ सरकार के लिए भी सोचने का विषय है जिसका जीएसटी लिया वह सुविधा नही दी।

लेखक

उमाशंकर दुबे ( वरिष्ट पत्रकार )

अध्यक्ष

लखनऊ जनकल्याण महासमिति

उत्तर प्रदेश लखनऊ

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