उत्तर प्रदेश

कोरोना काल मे निजी स्कूलों का किताबें बदलने का खेल जारी,महासमिति ने मुख्यमंत्री से की शिकायत

लखनऊ – कोरोना काल मे जहाँ एक तरफ पिछले साल स्कूलों में पढ़ाई नही हुई, ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर स्कूलों ने अभिभावकों से फीस के नाम पर मोटी रकम वसूले गए। कोरोना का प्रकोप अभी समाप्त नही हुवा बल्कि बढ़ता जा रहा है ऐसे में इस साल भी पढ़ाई कैसे होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है वही एक बार फिर स्कूल प्रबंधन किताबो के नाम पर नया खेल शुरू कर दिए है। यह आरोप लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने लगाया है और इस सम्बंध में मुख्यमंत्री से शिकायत की है। उमाशंकर दुबे ने आरोप लगाते हुवे मुख्यमंत्री से शिकायत की है कि पब्लिशर को लाभ पहुचाने और प्रबंधन अपनी जेब भरने की लालच में अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है। जबकिं अभिभावक अपने बच्चो को इस कोरोना काल मे एक दूसरे बच्चो से किताबें लेकर पढ़ाई करवाना चाहते है लेकिन स्कूल प्रबंधन पैसे की लालच में किताबें बदल दिए। उमाशंकर दुबे ने सेंटफ्रांसेस स्कूल गोमती नगर विस्तार का हवाला देते हुवे मुख्यमंत्री से शिकायत की है। उमाशंकर दुबे ने कहा स्कूल प्रबंधन ने एक एक क्लास की लगभग आधे दर्जन से अधिक किताबे बदल दिए है ऐसे में अभिभावकों पर बोझ और बढ़ना स्वाभाविक है। उदाहरण के तौर पर उमाशंकर दुबे ने सेंट फ्रांसिस स्कूल के कक्षा 8 का विवरण दिया है जिसमे हिंदी लैंग्वेज,इंग्लिश लैंग्वेज, कम्प्यूटर, जाग्रफी, संस्कृत और मैथ कुल 6 किताबें बदल गयी है। उमाशंकर दुबे ने कहा कि NCRT की जो किताबें जो 20 से 25 रुपये में आती है उतनी ही पन्ने की किताबें निजी पब्लिशर की 200 से 300 के बीच की है। शिक्षा के नाम पर यह एक तरह का भ्रस्टाचार है। जबकि स्कूल खोलने के नाम पर जहां एक तरफ चंदे लिए जाते है वही शहरी क्षेत्र में विकसित कालोनियों में रियायती दाम पर जमीन दी जाती है। शिक्षा सेवा का माध्यम है जिसे व्यवसाय के रूप में इस कदर शामिल कर लिया गया है जो कोरोना काल मे अभिभावकों के लिए मुशीबत बना हुवा है। महासमिति की शिकायत पर सेंट फ्रांसेस स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को राहत देने का भरोशा दिया है। सेंट फ्रांसेस स्कूल गोमती नगर विस्तार के प्रधानाचार्य ने बताया कि कुछ कक्षा की कुछ किताबें बदली गयी है लेकिन कोशिश रहेगी अन्य कक्षाओं की किताबें नही बदली जाएगी साथ ही दुकानदारों को निर्देश दिए जा रहे है कि किताबों के सेट के साथ साथ जो अभिभावक सिर्फ बदली गयी किताबें मांगते है उन्हें सिर्फ बदली गयी किताबें उपलब्ध कराए। अभिभावकों पर पूरा सेट किताबे खरीदने का दबाव न बनाये।इस सम्बंध में आज ही निर्देश जारी कर दिए गए है। उंन्होने कहा कोई भी दुकानदार यदि अभिभावकों पर सेंट किताबें लेने का दबाव बनाए तो अभिभावक स्कूल को सूचित करें।

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