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केजीएमयू में नान कोविड मरीजों की चल रही है डायलिसिस,RML और SGPGI में हाल बेहाल

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी

लखनऊ – कोरोना काल मे लखनऊ में किडनी के मरीजों का डायलिसिस नही हो पा रहा है जबकि सबसे ज्यादा लखनऊ में किडनी के मरीज है जो डायलिसिस न होने के कारण आय दिन दम तोड़ रहे है। यह आरोप लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने लगाया है। महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने कहा कि कोरोना जैसे आपातकाल मे लगातार शिकायतें आ रही थी कि बड़ी संख्या में किडनी के नान कोविड मरीजो का डायलिसिस नही हो पा रहा है जिसके कारण लोग दम तोड़ रहे है।

महासमिति ने शिकायत पर जमीनी हकीकत जनाने के लिए लखनऊ के तीन प्रमुख सरकारी संस्थान KGMU, RML और SGPGI का जायज़ा लिया तो पता चला KGMU ने बगैर नेफ्रोलॉजिस्ट के यूरोलॉजिस्ट और मेडीसिन के चिकित्सकों के सहयोग से पीपीपी मॉडल पर नान कोविड मरीजों का डायलिसिस चल रहा है, जबकि SGPGI में 6 नेफ्रोलॉजिस्ट और RML में 2 नेफ्रोलॉजिस्ट होने के बावजूद वहाँ नान कोविड मरीजों का डायलिसिस नही हो पा रहा है। लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष ने मामले की मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री से शिकायत करते हुवे KGMU के तर्ज पर जनहित में SGPGI और RML में पीपीपी मॉडल पर तत्काल डायलिसिस यूनिट लगवाने की मांग की है। साथ ही RML और SGPGI के निदेशकों को पत्र लिखकर KGMU के तर्ज पर नान कोविड मरीजों के लिए तत्काल इस कोरोना काल मे डायलिसिस यूनिट लगाने की मांग की है।

गौरतलब है कि लखनऊ में मात्र केजीएमयू के शताब्दी फेज-1 में ही डायलिसिस यूनिट है जहां नान कोविड किडनी के मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। लखनऊ जनकल्याण महासमिति की टीम ने जायज़ा लिया तो पता चला यह यूनिट पीपीपी मॉडल पर चलाया जा रहा है वह भी जनहित में सरकार की तरफ से व्यवस्था निःशुल्क है। इतना ही नही जो निःशुल्क सेवा के पात्र नही है उनका भी मात्र 1200 में डायलिसिस किया जा रहा है और यह सेवा 24 घंटे चल रही है। जबकिं निजी हॉस्पिटलों में डायलिसिस के नाम पर मरीजों से लाखों रुपये वशूले जा रहे है।

केजीएमयू में नेफ्रोलॉजी विभाग की जिम्मेदारी सम्हाल रहे कार्यवाहक विभागाध्यक्ष नेफ्रोलॉजी डॉक्टर विश्वजीत जीत सिंह ने बताया कि हमारे यहां 24 घंटे डायलिसिस की सेवाएं चल रही है। केजीएमयू में नान कोविड और कोविड दोनों डायलिसिस किया जा रहा है लेकिन हमारे पास कोई डीएम नेफ्रोलॉजिस्ट नही है। उंन्होने कहा यह महामारी है भारत पर विपत्ति का समय है ऐसे में सबको मिलकर काम करना होगा। यूरोलॉजिस्ट जो गुर्दो के सर्जन होते है और एमडी मेडीसिन जो गांधी वार्ड के डॉक्टर है यही लोग सब मिलकर डायलिसिस चला रहे है, रहा पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस की बात है तो केजीएमयू के लिए बहुत सफल अनुभव रहा है वह कंपनी डायलिसिस मशीन के साथ टेक्नीशियन और उपचार में लगने वाली कंज्युमेवल मेडिकल भी उपलब्ध करती है जिससे डायलिसिस होता है। इस कोरोना काल मे सकारात्मकता के साथ जनसहयोग करते हुवे हमे जनहित में काम करना होगा तभी हम इस कोविड के हालत पर काबू पा सकेंगे।

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