उत्तर प्रदेश

एलडीए आरडब्ल्यूए की लड़ाई में पीस रहा है आवंटी, रजिस्ट्री होने के बावजूद आवंटी को नही मिल रहा फ्लैट पर भौतिक कब्जा

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी

लखनऊ – अगर आप अपने सपनों के घर का सपना लखनऊ विकास प्राधिकरण के भारोशे देख रहे है और आप एलडीए का फ्लैट खरीदना चाहते तो सावधान हो जाये, क्या पता पूरा पैसे देने और रजिस्ट्री होने के बावजूद भी आपको आपने फ्लैट मे रहने को न मिले। आपको सुनकर हैरानी हो रही होगी कि भला ऐसे कैसे हो सकता है। वह भी एक सरकारी संस्था ऐसे कैसे कर सकती है।

आपने एलडीए को पूरा पैसा देकर फ्लैट खरीद लिया, एक तरफ बैंक का लोन देना पड़ रहा हो दूसरी तरफ किराये के मकान में रहते हो ऐसे हालात में आप को रोज एलडीए और आरडब्ल्यूए का चक्कर लगाना पड़े और दोनों एक दूसरे के पाले में गेंद डालते रहे और आप पैसे देकर कुछ समझ न पाए कि आखिर आपके साथ क्या हो रहा है तो आप क्या करेंगे । यह सब सुनने और समझने में थोड़ी हैरानी जरूर हो रही होगी लेकिन यह सच है।

लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने बताया कि मेंटिनेंस का पैसा आरडब्ल्यूए को न देना पड़े इसको लेकर अनाधिकृत तरीके से एलडीए आरडब्ल्यूए पर दबाव बनाकर आवंटी और आरडब्ल्यूए दोनों को उलझा रही है, जबकिं उस हालात में जबकिं आज भी आवंटियों से रजिस्ट्री के समय खुद 3 साल का मेंटिनेंस एलडीए द्वारा लिया जा रहा है जबकिं अपार्टमेंट की आरडब्ल्यूए बनने के बाद ऐसा नही किया जा सकता । मामला गोमती नगर विस्तार के अपार्टमेंट ग्रीनवुड़ आई जे ब्लाक का है।

गौरतलब है जे ब्लाक 901 नम्बर का फ्लैट अजय मणि के नाम से अभी पिछले वर्ष 28.09.2020 को लॉटरी के माध्यम से आवंटित हुवा था जिनके फ्लैट की रजिस्ट्री पिछले दिनों 17.02.2021 को एलडीए द्वारा किया गया । लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अजय मणि से सभी देय के साथ साथ 3 साल का मेंटिनेंस रुपया 47,330.00 भी एलडीए के खाते में जमा करा लिया जबकि उस हालात में जबकिं ग्रीनवुड़ आई जे ब्लाक का आरडब्ल्यूए 28 फरवरी 2018 को ही बन गया है और मेंटिनेंस सोसाइटी द्वारा किया जा रहा है।

ऐसे हालात में एलडीए आवंटी से मेंटिनेंस नही ले सकता बल्कि मेंटिनेंस आवंटी आरडब्ल्यूए में जमा कराकर उसकी रशीद एलडीए को उपलब्ध कराएगा ऐसी व्यवस्था खुद के एलडीए के प्राविधान में तत्कालीन वीसी पी एन सिंह के द्वारा जारी पत्रांक : 199 / उपा – कैम्प – जे.एस . / 18-19 दिनांक 21/5/2018 के कार्यालय आदेश के क्रम संख्या 1 में स्प्ष्ट लिखा है कि R.WA. के गठन के उपरान्त जिन आवंटियों की रजिस्ट्री नहीं हुई है उन्हें रजिस्ट्री कराने से पूर्व R.WA में मेन्टीनेंस धनराशि जमा कराकर भुगतान की प्रप्ति रसीद प्राधिकरण में प्रस्तुत करनी होगी लेकिन एलडीए द्वारा नए आवंटियों से खुद 3 साल का मेंटिनेंस खुद एलडीए के खाते में जमा करा लिया जा रहा है।

उमाशंकर दुबे ने आरोप लगाते हुवे कहा कि एलडीए आवंटियों को गुमराह कर आरडब्ल्यूए पर दबाव बनाकर उन्हें फ्लैट में बगैर मेंटिनेंस के दाखिल करने के लिए दबाव बना रहा है। ऐसे हालात में आरडब्ल्यूए और आवंटियों के बीच तनाव बना हुवा है।

आवंटी को लगता है आरडब्ल्यूए अनावश्यक दबाव बना रही है जबकि आरडब्ल्यूए अपने नियमों के अनुसार मेंटिनेंस के बगैर कैम्पस में प्रवेश की अनुमति नही दे रही । ऐसे हालात में जब आवंटी एलडीए का सहारा लेता है तो एलडीए तत्कालीन वीसी पी एन सिंह के पत्र का हवाला देकर आरडब्ल्यूए पर बकाया मेंटिनेंस लिए बगैर आवंटी को सोसायटी के सदस्य बनाकर फ्लैट में दाख़िल होने देने का दबाव बना रहा है।

जबकिं उसी पत्र में जारी आरडब्ल्यूए में मेंटिनेंस जमा कराने का अपना कर्तव्य भूल जा रहा है जो एक नए आवंटी के लिए पीड़ादायक बना हुवा है क्योकि सभी देय का भुकतान करने के बावजूद उन्हें अपना घर नही मिल रहा है जबकि आरडब्ल्यूए अपने मेंटिनेंस के लिए नियमों का हवाला दे रहा है। ऐसे हालात में एलडीए जबतक वह मेंटिनेंस का पैसा आरडब्ल्यूए को जमा नही करती तबतक आवंटी को फ्लैट में आने की अनुमति नही मिल सकेगी ऐसे हालात में रजिस्ट्री होने के बावजूद आवंटी अपने सपने के घर से लिये भटक रहा है

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