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आरडब्ल्यूए के अधिकार और कर्तव्य

रिपोर्ट – रामकुमार यादव

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी
लखनऊ . शहरों में अपार्टमेंट या कॉलोनी के किसी पॉकेट में रहने वाले लोग बिजली, पानी, सुरक्षा जैसे मसलों के लिए निवासियों का एक समूह बनाते हैं. ऐसे समूह को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसियेशन (आरडब्ल्यूए)कहते हैं.

क्यों जरूरी है आरडब्ल्यूए? इसे बनाने की क्या प्रक्रिया है ? क्या इसे कानूनी मान्यता हासिल है? कितने तरह के होते हैं RWA? कौन हो सकता है इसका सदस्य? हमने यहां इन सवालों का जवाब जानने की कोशिश की है.

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसियेशन (आरडब्ल्यूए) किसी सोसाइटी में रहने वाले लोगों का एक समूह है. यह उस सोसाइटी के रोजाना के कामकाज पर नजर रखता है. नया रियल एस्टेट कानून कहता है कि डेवलपर प्रोजेक्ट बनाने के बाद ओक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिलने के कुछ महीने के अंदर ही आरडब्ल्यूए वहां रहने वाले लोगों को सौंप देगा.

हाल तक हाउसिंग सोसाइटी में मेंटेनेंस का काम बिल्डर अपने हाथ में ही रखने की कोशिश करते थे. प्रोजेक्ट बनाकर बेच देने के बाद भी उसका कंट्रोल वे अपने पास इसलिए रखना चाहते थे ताकि उन्हें एक निश्चित कमाई होती रहे. लेकिन, अब हालात बदल गए हैं. नए रियल एस्टेट कानून में RWA से लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं.

रियल एस्टेट कानून में यह डवलपर की जिम्मेदारी है कि वह उचित कीमत लेकर तब तक बिल्डिंग की जरूरी सुविधाओं की देखभाल करता रहे जब तक कि उसके लिए RWA तैयार ना हो जाये. एक बार RWA बन जाने के बाद बिल्डर सारी जिम्मेदारी वहां रहने वाले लोगों को सौंप देगा.

कब होना चाहिए RWA का गठन
रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2016 के अनुसार किसी हाउसिंग सोसाइटी में ज्यादातर घर बिक जाने के बाद तीन महीने के अंदर वहां RWA का गठन करना जरूरी है. अगर बिल्डर इसके लिए पहल नहीं करता तो फ्लैट/घर मालिक खुद पहला कर RWA का गठन कर सकते हैं.

लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने कहा, ‘यह प्रावधान पहले के कानून में भी थे, लेकिन बिल्डर इसका खुलेआम उल्लंघन करते थे. अब रेरा के अमल में आने के बाद सभी बिंदु स्पष्ट हैं और बिल्डर पर उनका पालन करने की जिम्मेदारी बढ़ेगी. यह RWA के हिसाब से और फ़्लैट खरीदने वाले लोगों के हिसाब से बहुत जरूरी और बेहतर कदम है. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि ज्यादातर सरकारी बिल्डर एलडीए आवास विकास जैसे लोग ओसी जारी नही कर रहे वही बुकलेट में दिए वायदों के हिसाब से न तो निर्माण कराते है और न जनता के हितों का ध्यान रख रहे है। हलाकि आवास विकास आरडब्ल्यूए बनाकर उन नियमों का कुछ हद तक पांलन तो कर रहा लेकिन एलडीए आरडब्ल्यूए बनाने के बारे में कोई पहल नही करता मजबूरन निवासियों को आरडब्ल्यूए बनानां पड़ता है जबकि हैंडओवर आज तक किसी भी आरडब्ल्यूए को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नही दिया। कार्पस सहित तमाम फंड आज भी निवासियों के एलडीए अपने पास रखे है जिसका मूलधन तो दूर व्याज भी नही दे रहा।

महाराष्ट्र रेरा के प्रावधान
महाराष्ट्र रेरा के मुताबिक बिल्डर के लिए RWA का गठन करना जरूरी है. कॉमन एरिया की जिम्मेदारी भी RWA को सौंपना जरूरी है. इसके लिए अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसाइटी में 50 फीसदी फ्लैट बिकने के बाद बिल्डर को यह कदम उठाना है.

दिल्ली-एनसीआर रीजन में नोएडा, गाजियाबाद , गुरुग्राम जैसे इलाकों में हाउसिंग सोसाइटी की रेजिडेंशियल कॉलोनी में हर ब्लॉक या पॉकेट में एक RWA जरूर होता है.

कैसे बनायें RWA?
किसी प्रोजेक्ट का डेवलपर और उसमें रहने वाले लोग मिलकर एक जनरल बॉडी मीटिंग बुलाकर RWA का गठन कर सकते हैं. सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के मुताबिक कम से कम 4 या अधिक से अधिक 10 लोगों का नाम मेमोरेंडम ऑफ एसोसियेशन के लिए दिया जाना चाहिए.

इन सब लोगों को प्रबंधन के काम में हिस्सेदारी मिलती है. अगर ज्यादा लोग इस सूची में जगह पाना चाहते हैं तो इसके लिए चुनाव कराया जा सकता है.

रेजिडेंट्स से मिले सुझाव के आधार पर नियम बनाये जा सकते हैं . सोसाइटी बाय लॉज के नाम से जाने जाने वाले इस नियम में सोसाइटी के कामकाज से जुड़े नियम का जिक्र होना चाहिए. इसका पालन करना सभी निवासियों और किरायेदारों के लिए जरूरी होगा.

‘किसी सोसाइटी के लिए बिल्डिंग बाय लॉज नियम-कानून की तरह हैं. उनका पालन करना सभी के लिए कानूनन जरूरी है और उसका पालन नहीं करने वाले को उस सोसाइटी से निकाला जा सकता है.’

एक बार एड हॉक कमिटी या मैनेजमेंट कमिटी बन जाने के बाद अगले कदमों में कागजात का वेरिफिकेशन, एकाउंट बुक और डेवलपर द्वारा किये गए वादे के हिसाब से सुविधाओं पर काम करना शामिल है.

कमिटी द्वारा जांचे जाने वाले कागजातों में ओक्युपेंसी सर्टिफिकेट, फंड का विवरण, एकाउंट बुक, प्रॉपर्टी टाइटल, और जिम, क्लब,स्पा आदि के लिए जमा रकम का हिसाब शामिल है. RWA आम तौर पर सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर होते हैं. ये मेमोरेंडम ऑफ एसोसियेशन जैसे संवैधानिक दस्तावेज से चलते हैं.

क्या है दायरे से बाहर?
RWA हालांकि प्रॉपर्टी के मालिकाना हक़ से जुड़े आपके अधिकारों में दखल नहीं दे सकता. इसके अधिकार सोसाइटी के निवासियों की सुविधा, व्यवस्था के मेंटेनेंस, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सुरक्षा आदि तक ही सीमित हैं.

कितने तरह के होते हैं RWA?
आम तौर पर RWA दो तरह के होते हैं. रेजिडेंट वेलफेयर एसोसियेशन और को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी. RWA की तुलना में को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के पास अधिक अधिकार होते हैं. RWA दरअसल स्वैच्छिक संगठन हैं.

ये सुनिश्चित करते हैं कि वहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उचित कीमत पर मिले. को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के पास फ्लैट की खरीद-बिक्री की अनुमति देने का भी अधिकार होता है.

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