उत्तर प्रदेश

आरटीआई के दायरे में आए यूपी के निजी स्कूल, देना होगा फीस और खर्च का पूरा ब्योरा

उत्तर प्रदेश निजी स्कूलों को आरटीआई के दायरे में लाने वाला देश का एक ऐसा राज्य बन गया है जहाँ अब अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद मिली है। क्योंकि राज्य सूचना आयोग ने गुरुवार को निजी स्कूलों को अपने स्वयं के सार्वजनिक सूचना अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया है

रिपोर्ट – विवेक शर्मा

ब्रेकिंग न्यूज़ यूपी – उत्तर प्रदेश के सभी निजी स्कूल अब सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में आएंगे, अब वह आरटीआई के जरिए पूछे गए सभी सवालों के जवाब देने के लिए बाध्य होंगे, साथ ही स्कूल को अपनी फीस और खर्च का पूरा ब्योरा देना होगा,

शिक्षण संस्थानों को किसी भी व्यक्ति द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देने होंगे

उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों के आरटीआई के तहत आने का मतलब है कि अब शिक्षण संस्थानों को किसी भी व्यक्ति द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देने होंगे, साथ ही सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत स्कूल की फीस, उसका खर्च और स्कूल संबंधी अन्य जानकारी भी देनी होगी, यूपी के सूचना आयुक्त प्रमोद कुमार तिवारी ने इस संबंध में एक आदेश जारी कर निजी स्कूलों को जन सूचना अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है, ताकि आरटीआई मांग पर जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।

निजी स्कूल प्रशासकों को जन सूचना अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया जाए

राज्य के सूचना आयुक्त प्रमोद कुमार तिवारी ने लखनऊ के दो नामी स्कूलों को लेकर दायर एक अपील के बाद यह आदेश दिया, अपीलकर्ता ने मुख्य सचिव से सिफारिश की थी कि सार्वजनिक सूचना के महत्व को ध्यान में रखते हुए निजी स्कूल प्रशासकों को जन सूचना अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया जाए, इसके बाद प्रमोद कुमार ने निजी स्कूलों को निर्देश दिया कि वे उनमें सूचना अधिकारी नियुक्त करें ताकि लोगों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचित किया जा सके, इससे पहले निजी स्कूलों ने अभिभावकों या अन्य द्वारा मांगी गई जानकारी देने से इनकार कर दिया जाता था।

लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने इस फैसले का स्वागत किया है। महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने कहा निजी स्कूलों को आरटीआई के दायरे में आने से अनावश्यक फीस के साथ साथ अन्य तरह के मनमानी शुल्क पर लगाम लगेगी और कानूनी लड़ाई में यह आरटीआई वरदान साबित होगी। उमाशंकर दुबे के कहा यूपी सरकार ने सत्ता में आते ही एक नई व्यवस्था देने का काम किया था कि स्कूलों को अपना आय ब्यय सार्वजनिक करना होगा लेकिन स्कूल प्रबंधन इससे हमेशा बचते रहे है ऐसे में अब निजी स्कूलों के आरटीआई के दायरे में आने से कम से कम कानूनी रूप से फीस और खर्च का पूरा ब्योरा मिलेगा जो शिक्षा के नाम पर धनउगाही करने वालों स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही में काम आएगा और इससे अभिभावकों को राहत मिलेगी।

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