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अपार्टमेंट एक्ट के तहत बनी आरडब्ल्यूए को कमिश्नर को नही है भंग करने का अधिकार, उमाशंकर दुबे

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने खुद नियम का नही किया पालन

बगैर सीसी और ओसी के डिप्टी रजिस्टार ने कैसे किया आरडब्ल्यूए का रजिस्ट्रेशन

लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा आयोजित मिशन शक्ति वेबिनार में आरडब्ल्यूए की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुवे मंडलायुक्त रंजन कुमार ने कहा है था लखनऊ के अपार्टमेंटों की आरडब्ल्यूए भंग करके नई योजना लागू करने की तैयारी है इसके लिए एक योजना तैयार की जा रही है। इतना ही नही उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि वह खुद एक सोसायटी में रहते है और 2500 मेंटिनेंस देते है लेकिन उंसके बदले पर्याप्त सुविधाएं वहां नही मिलती, 4 लोग एक कमरे में बैठ कर सभी के लिए निर्णय लेते है जबकि सभी की सहभागिता होनी चाहिए। मंडलायुक्त के बयान के बाद लखनऊ की सभी आरडब्ल्यूए में हड़कंप मच गया। लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने कहा कि कमिश्नर को आरडब्ल्यूए भंग करने का अधिकार ही नही है। महासमिति ने इस सम्बंध में मंडलायुक्त को पत्र लिखा है। उमाशंकर दुबे ने मंडलायुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि लखनऊ जनकल्याण महासमिति आरडब्ल्यूए के संबंध में उठे सवाल और आपके जबाब से सहमत है लेकिन इस संबंध में यहां यह भी अवगत कराना है कि सभी आरडब्ल्यूए ऐसा नही करती है। उमाशंकर दुबे ने कहा कि आरडब्ल्यूए के संबंध में सरकार ने अपार्टमेंट एक्ट 2010 बनाये है और अपार्टमेंट एक्ट में जो नियम बनाये गए है उसी कानून के तहत आरडब्ल्यूए का गठन किया जाता है। रहा सवाल उसके पालन होने की तो यह बात सही है बहुत सी आरडब्ल्यूए इसका कड़ाई से पालन नही करती। इस संबंध में महासमिति को आए दिन कुछ निम्न प्रकार की ,शिकायत सामने आती है जिसमे कहीं न कहीं कानून का सही से पालन नही कराया जा रहा जिसके कारण सामान्य आवंटियों को दिक्कतें हो रही है। उमाशंकर दुबे ने कहा इस सबके पीछे कहीं न कहीं हमारी सरकारी व्यवस्था में लापरवाही ही सामने आ रही है जिसका कुछ चंद लोग फायदा उठा कर सामान्य सदस्यों के लिए समस्या उत्पन्न कर रहे है।

उमाशंकर दुबे ने समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करते हुवे कहा कि कई आरडब्ल्यूए अपना खुद का बाइलॉज बना रखी है जबकि अपार्टमेंट एक्ट 2010 के तहत मॉडल बाइलॉज बनना चाहिए आखिर डिप्टी रजिस्टार कार्यलाय ने ऐसे कैसे होने दिया। नियम है कि प्रतिवर्ष एक तिहारी बोर्ड के सदस्य रिटायर होंगे जिन्हें बोर्ड रिटायर करेगा साथ ही प्रति वर्ष चुनाव होगा, कितने आरडब्ल्यूए ने इसका पालन किया और यदि नही किया तो डिप्टी रजिस्टार कार्यालय क्या कर रहा है।रजिस्टर्ड बाइलॉज का पालन नही किया जा रहा जैसे किसी आरडब्ल्यूए के बाइलॉज में 10 सदस्य चुनन्ने की व्यवस्था है तो बगैर बाइलॉज में संशोधन के जब चाहे अपनी सुविधा के निर्धारित सदस्यो से कम सदस्य कुछ लोग नियम का पालन किये बगैर चुन लेते है इस संबंध में डिप्टी रजिस्टार कार्यालय क्यो कार्यवाही नही करता। कई दोषी लोग जिन्होंने अनुशासन हीनता की हो या आरडब्ल्यूए संचालन में दोषी साबित हुये है ऐसे लोग भी अपने बाहु बल के दबाव में पुनः आरडब्ल्यूए में शामिल हो जाते है जबकि नियम है ऐसे लोगों को आरडब्ल्यूए में शामिल नही किया जा सकता। मॉडल बाइलॉज में आम सभा बैठक, बोर्ड के निर्णय, प्रतिमाह आय व्यय का व्योरा देने की व्यवस्था है लेकिन बहुत से आरडब्ल्यूए से यही शिकायत आती है कि चंद लोग एक कमरे में बैठकर जनता के पैसे का दुरूपयोग करते है कोई बैठक नही बुलाते,कोई आय व्यय नही देते और किसी भी प्रकार का यदि कोई सामान्य निवासी सवाल उठाता तो अपनी ऊंची पहुंच और दबाव से सामान्य आवंटियों को प्रताड़ित करने का कार्य करते है। मारपीट करते है। कोई सामान्य निवासी आय व्यय का व्योरा मांग ले तो उसे अपनी पहुंच का लाभ उठा कर मुकदमा दर्ज कराने का कार्य करते है या धमकी देते है । उमाशंकर दुबे ने कहा आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी ऐसे लोग नही बन सकते जिनके ऊपर भ्रस्टाचार के आरोप हो या पिछली समिति के कार्यकाल में दोषी पाए गए हो,या उन पर भ्रस्टाचार के आरोप में मुकदमे दर्ज हो,या जीबीएम में उन्हें दोषी पाया गया हो लेकिन सुनने में आता है ऐसे लोग दबंगई करके आरडब्ल्यूए में शामिल हो जाते है ऐसी परिस्थितियों में डिप्टी रजिस्टार कार्यालय उनका रजिस्ट्रेशन कैसे करता है यह भी एक बड़ा सवाल है। इतना ही नही निःस्वार्थ भाव से नियमानुसार कार्य करने वाली आरडब्ल्यूए को भी काफी दिक्कत इस लिए आती है कि उनके आरडब्ल्यूए में बड़े -बड़े पदों पर बैठे अधिकारी, नेता अपने प्रभाव के कारण मेंटिनेंस नही देते या अनावश्यक दबाव बनाते है लेकिन आरडब्ल्यूए का कोई प्रशासनिक स्तर पर सहयोग नही मिलता। उमाशंकर दुबे आरोप लगाते हुवे कहा कि उपरोक्त के लिए कहीं न कहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण या वह बिल्डर जिम्मेदार है जिन्होंने खुद नियम का पालन नही किया। इस सम्बंध में यह भी अवगत करना है कि अपार्टमेन्ट के निवासियों से आरडब्ल्यूए के गठन में बहुत सी गलतियां जाने अंजाने में हुई है या कुछ ने जानबूझ कर साजिश के तहत की हो लेकिन यदि बिल्डर की जिम्मेदारी थी आरडब्ल्यूए बनाकर उसका गठन कराना और नियमित रूप से आवंटियों को जिम्मेदारी देना तो ऐसा क्यो नही किया गया। बगैर सीसी और ओसी के डिप्टी रजिस्टार ने आरडब्ल्यूए का रजिस्ट्रेशन कैसे किया यह सब एक बड़ा सवाल है। लखनऊ जनकल्याण महासमिति ने कहा अपार्टमेन्ट एक्ट 2010 के तहत आरडब्ल्यूए बनाने की जिम्मेदारी बिल्डर की हैं लेकिन एलडीए ने नियमो का पालन नही किया, डिप्टी रजिस्टार की जिम्मेदारी है कि आरडब्ल्यूए रजिस्ट्रेशन के पहले बिल्डर से सीसी और ओसी प्राप्त कर ले लेकिन डिप्टी रजिस्टार चिटफंड ने ऐसा नही किया और अब जब अव्यवथा हो रही है तो इसके लिए दोषी आरडब्ल्यूए को बनाना उचित नही है। उमाशंकर दुबे ने लखनऊ की सभी आरडब्ल्यूए चाहे सरकारी हो या निजी, में अपार्टमेन्ट एक्ट का पालन कराना सुनिश्चित किया जाय, साथ ही साथ बिल्डरों को निर्देशित करने की कृपा करें कि बिल्डर नियमानुसार अपार्टमेन्ट एक्ट के साथ आरडब्ल्यूए बनाकर निवासियों को नियमावली के साथ हैंडओवर करे। बिल्डर सभी बिल्डिंग की सीसी और ओसी जारी करे। बुकलेट में किये गए वायदो के साथ आरडब्ल्यूए का कार्पस फंड,और मेंटिनेंस व्याज सहित वापस किया जाय, जिससे निवासी नियमानुसार आरडब्ल्यूए संचालन कर सके।

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